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Ganesh Ji Ki Katha: गणगौर की कथा से पहले जरूर पढ़ें गणेश जी की कहानी, इसके बिना अधूरी है पूजा

Ganesh Ji Ki Katha: आज गणगौर पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन गणगौर की कहानी से पहले गणेश जी की कहानी जरूर पढ़ें। इससे पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाएगा।

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Ganesh Ji Ki Katha

Ganesh Ji Ki Kahani: आज भारत में गणगौर पूजा (Gangaur Puja) का पर्व मनाया जा रहा है। जिसकी खास रौनक राजस्थान में देखने को मिलती है। इस त्योहार में माता पार्वती और शिव जी की पूजा होती है। हर साल ये पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है। मान्यता है इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अगर आप इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं तो आज के दिन गणगौर की कहानी के साथ गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani) भी जरूर पढ़ें।

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha 2026)

एक बुढ़िया माई थी जो मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। लेकिन वो रोज बनाए रोज गल जाए। एक दिन उसके घर के पास एक सेठ का मकान बन रहा था। वो बोली पत्थर का गणेश बना दो। मकान बनाने वाले मिस्त्री बोले। जितने में हम तेरा पत्थर का गणेश घड़ेंगे उतने में अपनी दीवार ना चिनेंगे। बुढ़िया बोली को गुस्सा आ गया उसने बोला राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। बुढ़िया के ऐसा कहते ही उनकी दीवार टेढ़ी हो गई। अब वो दीवार चिनें और ढा देवें, चिने और ढा देवें। इस तरह करते-करते शाम हो गई। शाम में सेठ आए तो उन्होंने देखा आज तो कोई काम नहीं हुआ। (Gangaur Ke Geet 2026)

तब मकान बनाने वाले मिस्त्री बोले एक बुढ़िया आई थी वो कह रही थी पत्थर का गणेश घड़ दो, हमने नहीं घड़ा तो उसने कहा तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। तब से दीवार सीधी ही नहीं बन रही है। सेठ ने बुढ़िया बुलवाई। सेठ ने कहा हे माई हम तेरा लिए सोने का गणेश गढ़ देंगे। हमारी दीवार सीधी कर दो। सेठ ने बुढ़िया को सोने का गणेश बनाकर दिया। ऐसा करते हुए सेठ की दीवार सीधी हो गई। गणेश भगवान जी जैसे सेठ की दीवार सीधी की वैसी सबकी करना।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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