Ganpati Ji Ki Aarti, Sukhkarta Dukhharta Aarti Lyrics (सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची आरती के लिरिक्स): गणेश चतुर्थी एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसके बाद 10 दिनों तक बप्पा हमारे घर रहते हैं। इस दौरान गणेश जी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है और पूजा के बाद आरती की जाती है। यहां से आप गणपति जी की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं। यहां 'सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची। नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।' आरती के पूरे लिरिक्स मौजूद हैं। साथ ही 'शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको।' आरती के लिरिक्स भी दिए गए हैं।
गणेश जी की आरती इन हिंदी (Ganesh Ji Ki Aarti In Hindi)
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची।
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची।
कंठी झलके माल मुकताफळांची।
जय देव जय देव..
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति।
दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति।
जय देव जय देव॥
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा।
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा।
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया।
जय देव जय देव..
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति।
दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति।
जय देव जय देव॥
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना ।
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ।
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटी पावावे निर्वाणी, रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव..
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति।
दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति।
जय देव जय देव॥
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको (Shendur Lal Chadhayo)
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।
हाथ लिए गुड लड्डू सांई सुरवरको ।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥
जय देव जय देव..
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ॥
अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।
कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी
गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥
जय देव जय देव..
जय देव जय देव,
जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ॥
भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतत संपत सबही भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥
जय देव जय देव..
जय देव जय देव,
जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता, जय देव जय देव ॥
