Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, LIVE: गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, Ganesh Ji Ki Aarti Pdf Download, Jai Ganesh Jai Ganesh Deva (गणेश जी की आरती लिखित में ) Live: आरती - ७ॐ इदः हविः प्रजननं मे अस्तु दशवीरः सर्वगणः स्वस्तये।
आत्मसनि प्रजासनि पशुसनि लोकसन्यभयसनि। अग्निः प्रजां बहुलां मे करोत्वन्नं पयो रेतो अस्मासु धत्त ।।गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को जन्म दिया था। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। पहले दिन गणेश चतुर्थी को बप्पा को स्थापित किया जाता है और अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर उनको विदाई दी जाती है। यहां देखें गणेश चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त, गणेश मूर्ति को घर पर कब लाएं, गणपति स्थापना मुहूर्त 2025 आज कब है, गणेश चतुर्थी की कहानी, गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, गणेश चतुर्थी की आरती लिरिक्स, गणेश पूजा मंत्र, गणेश जी की रंगोली, आज गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल टुडे, गणपति स्थापना का शुभ समय, गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है आदि की विस्तृत जानकारी। देखें गणपति स्थापना मंत्र।
क्या है गणेश चतुर्थी पर शाम की आरती का टाइम, यहां से नोट करें
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गणेश चतुर्थी पर किन चीजों की मनाही है
गणेश चतुर्थी 2025 में कब है
27 अगस्त 2025 को बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। भाद्रमद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त, दोपहर 1:54 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे तक चलेगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा।
गणेश चतुर्थी की संपूर्ण जानकारी यहां देखें
गणेश चतुर्थी व्रत कथा हिंदी में
2025 में गणेश मूर्ति को घर पर कब लाएं
27 अगस्त को यानी बुधवार के दिन गणपति स्थापना की मुख्य अवधि 11:05 AM से दोपहर 1:40 PM के बीच रहेगी। हालांकि 27 अगस्त को दोपहर 12:22 बजे से दोपहर के 1:59 बजे के बीच राहुकाल रहेगा। ऐसे में 27 अगस्त को दोपहर 12:22 बजे से पहले गणेश जी की मूर्ति घर लाना सही रहेगा। कुछ लोग गणेश जी की मूर्ति को तिथि के अनुसार भी लेकर आते हैं। ऐसे में 26 अगस्त, दोपहर 1:54 बजे से चतुर्थी तिथि रहेगी। तो इस दिन भी गणपति घर लाए जा सकते हैं। लेकिन इनको ढककर रखें और स्थापना 27 अगस्त को शुभ समय में ही करें।
गणेश चतुर्थी का 27 अगस्त 2025 का पंचांग
गणपति स्थापना मुहूर्त 2025 में कब है
27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी है। इस तारीख पर गणपति स्थापना का शुभ समय 11:05 AM से दोपहर 1:40 PM के बीच का है। इसके बाद दोपहर 1:59 बजे तक राहुकाल रहेगा तो इस दौरान पूजा ना करें। नोट करें कि 27 अगस्त का शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM के बीच है। वहीं 27 अगस्त को अमृत काल मुहूर्त सुबह 07:33 से सुबह 09:09 के बीच का होगा।
वैसे गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। लेकिन 27 अगस्त को यह मुहूर्त नहीं मिल रहा है।
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गणेश जी का ध्यान मंत्र
शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
इस मंत्र में भगवान गणेश जी को श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज और प्रसन्नवदन स्वरूप वाला बताया गया है। मंत्र जाप के साथ गणपति को इसी रूप में ध्यान करें। इससे विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल मिलता है।
जय गणेश जय गणेश देवा - गणेश जी की आरती लिखित में
जय गणेश देवा, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश देवा...
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश देवा...
हार चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश देवा...
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश देवा...
गणेश चतुर्थी पर राशि अनुसार भोग और लाभ:
| राशि | भोग | लाभ |
| ------------ | -------------------------- | --------------------------------------- |
| मेष राशि | बेसन के लड्डू, मोदक | मानसिक शक्ति व आत्मविश्वास में वृद्धि |
| वृषभ राशि | दही-गुड़, मावे की मिठाई | वैवाहिक जीवन में मिठास, आर्थिक लाभ |
| मिथुन राशि | नारियल, नारियल बर्फी | वाणी में मधुरता, पारिवारिक सुख |
| कर्क राशि | दूध, चावल की खीर | मन की शांति, संतान सुख |
| सिंह राशि | शहद, नारियल मोदक | मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता |
| कन्या राशि | तिल-गुड़ के लड्डू | रोगों से मुक्ति, मानसिक स्थिरता |
| तुला राशि | मावे की मिठाई, गुलाब जामुन | सौंदर्य, आकर्षण व संतुलन में वृद्धि |
| वृश्चिक राशि | लाल मिठाई (इमरती, जलेबी) | गुप्त शत्रुओं से रक्षा, साहस |
| धनु राशि | सूजी का हलवा, गुड़ | भाग्य में वृद्धि, धार्मिक दृष्टि से लाभ |
| मकर राशि | रबड़ी, दूध से बनी मिठाई | कार्य में सफलता, संयम व अनुशासन |
| कुंभ राशि | शहद व अनार | मित्रता, समाज में पहचान, नए अवसर |
| मीन राशि | मिश्री, तुलसी के पत्ते | भक्ति भावना, आध्यात्मिक उन्नति |
।। गणपति अथर्वशीर्ष पाठ ।।
ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा:।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।।
स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि::।
व्यशेम देवहितं यदायु:।1।
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:। स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:।
स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि:।। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।2।
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्तासि।।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
अव श्रोतारं। अवदातारं।।
अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।3।।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।4।
सर्व जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।5।।
त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।6।।
गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। गणपति देवता।।
ॐ गं गणपतये नम:।।7।।
एकदंताय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नोदंती प्रचोद्यात।।
एकदंत चतुर्हस्तं पारामंकुशधारिणम्।।
रदं च वरदं च हस्तै र्विभ्राणं मूषक ध्वजम्।।
रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।।
रक्त गंधाऽनुलिप्तागं रक्तपुष्पै सुपूजितम्।।8।।
भक्तानुकंपिन देवं जगत्कारणम्च्युतम्।।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतै: पुरुषात्परम।।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनांवर:।। 9।।
नमो व्रातपतये नमो गणपतये।। नम: प्रथमपत्तये।।
नमस्तेऽस्तु लंबोदारायैकदंताय विघ्ननाशिने शिव सुताय।
श्री वरदमूर्तये नमोनम:।।10।।
एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।। स: ब्रह्मभूयाय कल्पते।।
स सर्वविघ्नैर्न बाध्यते स सर्वत: सुख मेधते।। 11।।
सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।।
सायं प्रात: प्रयुंजानो पापोद्भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।।
धर्मार्थ काममोक्षं च विदंति।।12।।
इदमथर्वशीर्षम शिष्यायन देयम।।
यो यदि मोहाददास्यति स पापीयान भवति।।
सहस्त्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत।।13 ।।
अनेन गणपतिमभिषिंचति स वाग्मी भवति।।
चतुर्थत्यां मनश्रन्न जपति स विद्यावान् भवति।।
इत्यर्थर्वण वाक्यं।। ब्रह्माद्यारवरणं विद्यात् न विभेती
कदाचनेति।।14।।
यो दूर्वां कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति।।
यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति।। स: मेधावान भवति।।
यो मोदक सहस्त्रैण यजति।
स वांञ्छित फलम् वाप्नोति।।
य: साज्य समिभ्दर्भयजति, स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।
अष्टो ब्राह्मणानां सम्यग्राहयित्वा सूर्यवर्चस्वी भवति।।
सूर्य गृहे महानद्यां प्रतिभासंनिधौ वा जपत्वा सिद्ध मंत्रोन् भवति।।
महाविघ्नात्प्रमुच्यते।। महादोषात्प्रमुच्यते।। महापापात् प्रमुच्यते।
स सर्व विद्भवति स सर्वविद्भवति। य एवं वेद इत्युपनिषद।।16।।
।। अर्थर्ववैदिय गणपत्युनिषदं समाप्त:।।
सर्वदा सर्वकार्येषु नारिথাকুন। येर्षा हृदिस्थो भगवान्मङ्गला तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराव विद्याबलं देववर्ण तदेव लक्ष्मीप लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतले येषामिन्दीवरश्यामो हृदयस्थीन यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थीवर तत्र श्रीर्विजयो भूतिधुँवा পসিসি। अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पश तेर्षा नित्याभियुक्तानां योगश्रेर्यवाह स्मृतेः सकलकल्याणभाजनं यत्र जायते। पुरुर्ष तमर्ज नित्यं व्रजामि शरणं हरि। सर्वेष्वारम्भकार्येषु त्रयस्त्रिभुवनेश्वराः। देवा दिशन्तु नः सिद्धि बोशानजनार्दनाः॥ विश्वेशं माधवं दुण्डिं दण्डपाणिं च भैरवम्। वन्दे कार्शी गुहां गङ्गां भवानीं मणिकर्णिकाम्॥ वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्ययमप्रथ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः ॥
हाथमें लिये अक्षत-पुष्पको गणेशाम्बिकापर बढ़ा दें।
गणेश जी के इन मंत्र का जप करने से दूर होती हैं विघ्न-बाधाएं
Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, LIVE: चांद निकलने का टाइम, गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
Ganesh Ji Ki Aarti 2025 Ganesh Chaturthi Puja Vidhi
आरती श्री गणपति जी: गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती लिरिक्स
गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।
तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।
धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।
सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।
लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।
श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।
देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।
पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।
चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं
पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।
सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
Ganesh Chaturthi Evening Aarti Time
गणेश जी को खुश करने का मंत्र
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले इस मंत्र का जप करने से काम में आने वाली सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
गणेश जी को क्या क्या चढ़ता है
गणेश जी के 10 नाम
गणेश जी का टूटा दांत किसका प्रतीक है?
कितने दिन तक चलता है गणेश चतुर्थी का त्यौहार?
गणेश जी की आरती - Ganesh Ji ki Aarti
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश देवा...
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश देवा...
हार चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश देवा...
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश देवा...
गणेश भगवान की जय, पार्वती के लल्ला की जय
गणेश चतुर्थी का चांद देखना चाहिए या नहीं?
पौराणिक कथा की मानें तो, एक बार भगवान गणेश ने चंद्रमा को उसके अभिमान के कारण श्राप दिया था कि इस दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा को देखेगा, वह झूठे कलंक का भागी होगा। इसे "मिथ्या दोष" कहा जाता है। यही कारण है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन चांद को नहीं देखना चाहिए।
गणेश चतुर्थी का चांद क्यों नहीं देखा जाता है
गणेश जी ने तुरंत उस सांप को पकड़कर अपने पेट पर बांध लिया। यह दृश्य चंद्र देव ने देखा तो वह जोर से हंस पड़े। इस पर गणेश जी ने क्रोधित होकर उनको श्राप दिया कि - आज से जो भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन तुम्हारा दर्शन करेगा, उसे मिथ्या कलंक (झूठा आरोप) लगेगा और उसकी बदनामी होगी।
सुखकर्ता - दुःखहर्ता आरती
गणेश चतुर्थी व्रत में क्या खाएं
कलश को गणेश जी के किस ओर स्थापित करें
गोदी में उठा लो मेरी मां गजानन छोटे हैं - गणेश जी के भजन लिरिक्स
मेरे गजानन के छोटे-छोटे पांव हैं,
घुंघरू पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन के छोटे-छोटे अंग हैं,
पीताम्बर पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन के छोटे-छोटे हाथ हैं,
कंगना पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन का छोटा सा गला है,
माला पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन के छोटे-छोटे कान हैं,
कुण्डल पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन का छोटा सा मुख है,
मोदक खिला दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
मेरे गजानन का छोटा सा शीश है,
मुकुट पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
क्या गणेश चतुर्थी पर नॉन वेज खा सकते हैं
Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, Aarti गणेश भगवान की आरती LIVE: मूर्ति स्थापना से पहले इन बातों को नज़रअंदाज़ न करें!
- ॐ ब्रह्मा विष्णु रुद्र देवताभ्यो नमः । शिरसि ।
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् । मुखे ।
- ॐ प्राणाय देवताय नमः । हृदि ।
- ॐ अं बीजाय नमः । गुह्ये ।
- ॐ श्रीं शक्त्यै नमः । पादयोः ।
- ॐ क्लीं कीलकाय नमः । सर्वांगेषु ।
गणपति वंदना के लिए कौन सा श्लोक पढ़ें
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥
