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Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, LIVE: गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, Ganesh Ji Ki Aarti Pdf Download, Jai Ganesh Jai Ganesh Deva (गणेश जी की आरती लिखित में ) Live: आरती - ७ॐ इदः हविः प्रजननं मे अस्तु दशवीरः सर्वगणः स्वस्तये।

आत्मसनि प्रजासनि पशुसनि लोकसन्यभयसनि। अग्निः प्रजां बहुलां मे करोत्वन्नं पयो रेतो अस्मासु धत्त ।।गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को जन्म दिया था। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। पहले दिन गणेश चतुर्थी को बप्पा को स्थापित किया जाता है और अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर उनको विदाई दी जाती है। यहां देखें गणेश चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त, गणेश मूर्ति को घर पर कब लाएं, गणपति स्थापना मुहूर्त 2025 आज कब है, गणेश चतुर्थी की कहानी, गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, गणेश चतुर्थी की आरती लिरिक्स, गणेश पूजा मंत्र, गणेश जी की रंगोली, आज गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल टुडे, गणपति स्थापना का शुभ समय, गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है आदि की विस्तृत जानकारी। देखें गणपति स्थापना मंत्र

क्या है गणेश चतुर्थी पर शाम की आरती का टाइम, यहां से नोट करें

Medha ChawlaUpdated Aug 27, 2025, 19:49 IST
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Ganesh Chaturthi Puja Vidhi,  LIVE: गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, LIVE: गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,

Ganesh Chaturthi 2025 Date (गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना शुभ मुहूर्त) Shree Ganesh Puja Mantra Sampoorn Vidhi Mantra (गणेश पूजन विधि मंत्र सहित) Samagri List (सामग्री लिस्ट) LIVE: भगवान गणेश के जन्म दिवस के तौर पर गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रमद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ होकर अगले 10 दिन तक यानी अनंत चतुर्दशी तक चलता है। माना जाता है कि इसी दिन ही मां पार्वती ने भगवान गणेश को अपने शरीर से उतरे उबटन से उत्पन्न किया था। संकटों से मुक्ति और सफलता की प्राप्ति के लिए भक्त भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। यहां आप गणपति स्थापना की विधि के साथ गणेश चतुर्थी 2025 की तारीख, 2025 में गणेश मूर्ति को घर पर कब लाएं, गणपति स्थापना मुहूर्त 2025 में कब है, गणेश चतुर्थी की कहानी, गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, गणेश चतुर्थी की आरती लिरिक्स आदि की जानकारी पा सकते हैं।

गणेश चतुर्थी पर किन चीजों की मनाही है

गणेश चतुर्थी 2025 में कब है

27 अगस्त 2025 को बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। भाद्रमद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त, दोपहर 1:54 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे तक चलेगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा।

गणेश चतुर्थी की संपूर्ण जानकारी यहां देखें

गणेश चतुर्थी व्रत कथा हिंदी में

2025 में गणेश मूर्ति को घर पर कब लाएं

27 अगस्त को यानी बुधवार के दिन गणपति स्थापना की मुख्य अवधि 11:05 AM से दोपहर 1:40 PM के बीच रहेगी। हालांकि 27 अगस्त को दोपहर 12:22 बजे से दोपहर के 1:59 बजे के बीच राहुकाल रहेगा। ऐसे में 27 अगस्त को दोपहर 12:22 बजे से पहले गणेश जी की मूर्ति घर लाना सही रहेगा। कुछ लोग गणेश जी की मूर्ति को तिथि के अनुसार भी लेकर आते हैं। ऐसे में 26 अगस्त, दोपहर 1:54 बजे से चतुर्थी तिथि रहेगी। तो इस दिन भी गणपति घर लाए जा सकते हैं। लेकिन इनको ढककर रखें और स्थापना 27 अगस्त को शुभ समय में ही करें।

गणेश चतुर्थी का 27 अगस्त 2025 का पंचांग

गणपति स्थापना मुहूर्त 2025 में कब है

27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी है। इस तारीख पर गणपति स्थापना का शुभ समय 11:05 AM से दोपहर 1:40 PM के बीच का है। इसके बाद दोपहर 1:59 बजे तक राहुकाल रहेगा तो इस दौरान पूजा ना करें। नोट करें कि 27 अगस्त का शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM के बीच है। वहीं 27 अगस्त को अमृत काल मुहूर्त सुबह 07:33 से सुबह 09:09 के बीच का होगा।

वैसे गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। लेकिन 27 अगस्त को यह मुहूर्त नहीं मिल रहा है।

Ganesh Chaturthi ki Sanskrit Shubhkamnayein | गणेश चतुर्थी पर पढ़े भगवान श्री गणेश के 108 ये नाम होंगे सभी मनोकामएं पूरी

गणेश जी का ध्यान मंत्र

शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

इस मंत्र में भगवान गणेश जी को श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज और प्रसन्नवदन स्वरूप वाला बताया गया है। मंत्र जाप के साथ गणपति को इसी रूप में ध्यान करें। इससे विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल मिलता है।

जय गणेश जय गणेश देवा - गणेश जी की आरती लिखित में

जय गणेश देवा, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश देवा...

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश देवा...

हार चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश देवा...

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश देवा...

गणेश चतुर्थी पर राशि अनुसार भोग और लाभ:

| राशि | भोग | लाभ |
| ------------ | -------------------------- | --------------------------------------- |
| मेष राशि | बेसन के लड्डू, मोदक | मानसिक शक्ति व आत्मविश्वास में वृद्धि |
| वृषभ राशि | दही-गुड़, मावे की मिठाई | वैवाहिक जीवन में मिठास, आर्थिक लाभ |
| मिथुन राशि | नारियल, नारियल बर्फी | वाणी में मधुरता, पारिवारिक सुख |
| कर्क राशि | दूध, चावल की खीर | मन की शांति, संतान सुख |
| सिंह राशि | शहद, नारियल मोदक | मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता |
| कन्या राशि | तिल-गुड़ के लड्डू | रोगों से मुक्ति, मानसिक स्थिरता |
| तुला राशि | मावे की मिठाई, गुलाब जामुन | सौंदर्य, आकर्षण व संतुलन में वृद्धि |
| वृश्चिक राशि | लाल मिठाई (इमरती, जलेबी) | गुप्त शत्रुओं से रक्षा, साहस |
| धनु राशि | सूजी का हलवा, गुड़ | भाग्य में वृद्धि, धार्मिक दृष्टि से लाभ |
| मकर राशि | रबड़ी, दूध से बनी मिठाई | कार्य में सफलता, संयम व अनुशासन |
| कुंभ राशि | शहद व अनार | मित्रता, समाज में पहचान, नए अवसर |
| मीन राशि | मिश्री, तुलसी के पत्ते | भक्ति भावना, आध्यात्मिक उन्नति |

।। गणपति अथर्वशीर्ष पाठ ।।

ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा:।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।।
स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि::।
व्यशेम देवहितं यदायु:।1।

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:। स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:।
स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि:।। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।2।

ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्तासि।।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
अव श्रोतारं। अवदातारं।।
अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।3।।

त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।4।

सर्व जगदि‍दं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।5।।

त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।6।।

गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। ग‍णपति देवता।।
ॐ गं गणपतये नम:।।7।।

एकदंताय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नोदंती प्रचोद्यात।।
एकदंत चतुर्हस्तं पारामंकुशधारिणम्।।
रदं च वरदं च हस्तै र्विभ्राणं मूषक ध्वजम्।।
रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।।
रक्त गंधाऽनुलिप्तागं रक्तपुष्पै सुपूजितम्।।8।।

भक्तानुकंपिन देवं जगत्कारणम्च्युतम्।।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतै: पुरुषात्परम।।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनांवर:।। 9।।

नमो व्रातपतये नमो गणपतये।। नम: प्रथमपत्तये।।
नमस्तेऽस्तु लंबोदारायैकदंताय विघ्ननाशिने शिव सुताय।
श्री वरदमूर्तये नमोनम:।।10।।

एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।। स: ब्रह्मभूयाय कल्पते।।
स सर्वविघ्नैर्न बाध्यते स सर्वत: सुख मेधते।। 11।।

सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।।
सायं प्रात: प्रयुंजानो पापोद्‍भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।।
धर्मार्थ काममोक्षं च विदंति।।12।।

इदमथर्वशीर्षम शिष्यायन देयम।।
यो यदि मोहाददास्यति स पापीयान भवति।।
सहस्त्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत।।13 ।।

अनेन गणपतिमभिषिं‍चति स वाग्मी भ‍वति।।
चतुर्थत्यां मनश्रन्न जपति स विद्यावान् भवति।।
इत्यर्थर्वण वाक्यं।। ब्रह्माद्यारवरणं विद्यात् न विभेती
कदाचनेति।।14।।

यो दूर्वां कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति।।
यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति।। स: मेधावान भवति।।
यो मोदक सहस्त्रैण यजति।
स वांञ्छित फलम् वाप्नोति।।
य: साज्य समिभ्दर्भयजति, स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।

अष्टो ब्राह्मणानां सम्यग्राहयित्वा सूर्यवर्चस्वी भवति।।
सूर्य गृहे महानद्यां प्रतिभासंनिधौ वा जपत्वा सिद्ध मंत्रोन् भवति।।
महाविघ्नात्प्रमुच्यते।। महादोषात्प्रमुच्यते।। महापापात् प्रमुच्यते।
स सर्व विद्भवति स सर्वविद्भवति। य एवं वेद इत्युपनिषद।।16।।
।। अर्थर्ववैदिय गणपत्युनिषदं समाप्त:।।


सर्वदा सर्वकार्येषु नारिথাকুন। येर्षा हृदिस्थो भगवान्मङ्गला तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराव विद्याबलं देववर्ण तदेव लक्ष्मीप लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतले येषामिन्दीवरश्यामो हृदयस्थीन यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थीवर तत्र श्रीर्विजयो भूतिधुँवा পসিসি। अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पश तेर्षा नित्याभियुक्तानां योगश्रेर्यवाह स्मृतेः सकलकल्याणभाजनं यत्र जायते। पुरुर्ष तमर्ज नित्यं व्रजामि शरणं हरि। सर्वेष्वारम्भकार्येषु त्रयस्त्रिभुवनेश्वराः। देवा दिशन्तु नः सिद्धि बोशानजनार्दनाः॥ विश्वेशं माधवं दुण्डिं दण्डपाणिं च भैरवम्। वन्दे कार्शी गुहां गङ्गां भवानीं मणिकर्णिकाम्॥ वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्ययमप्रथ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः ॥

हाथमें लिये अक्षत-पुष्पको गणेशाम्बिकापर बढ़ा दें।

AUG 27, 2025 19:27 IST

गणेश जी के इन मंत्र का जप करने से दूर होती हैं विघ्न-बाधाएं

ऊँ सुमुखाय नम:ऊँ एकदंताय नम:ऊँ कपिलाय नम:ऊँ गजकर्णाय नम:ऊँ लंबोदराय नम:ऊँ विकटाय नम:ऊँ विघ्ननाशाय नम:ऊँ विनायकाय नम:ऊँ धूम्रकेतवे नम:ऊँ गणाध्यक्षाय नम:ऊँ भालचंद्राय नम:ऊँ गजाननाय नम:
AUG 27, 2025 19:09 IST

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, LIVE: चांद निकलने का टाइम, गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मा नो मध्या रीरिषतायुर्गन्तोः ।॥ अदितिर्डी-रदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः । विश्वे देवा अदितिः पञ्च जना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम् ॥ (शु० य० २५। १४-२३) डी: शान्तिरन्तरिक्षः शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वः शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ (शु० य० ३६ । १७) यतो यतः समीहये ततो नो अभयं कुरु। शं नः कुरु प्रजाभ्योऽभयं नः पशुभ्यः ॥ सुशान्तिर्भवतु ॥ (शु० य० ३६। २२)
AUG 27, 2025 19:07 IST

Ganesh Ji Ki Aarti 2025 Ganesh Chaturthi Puja Vidhi

ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः। देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे ॥ देवानां भद्रा सुमतिऋजूयतां देवानाः रातिरभि नो निवर्तताम्। देवानाः सख्यमुपसेदिमा वयं देवा न आयुः प्रतिरन्तु जीवसे ॥ तान्पूर्वया निविदा हूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्त्रिधम्। अर्यमणं वरुणः सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत् ॥ तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः । तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम् ॥ तमीशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियञ्जिन्वमवसे हूमहे वयम्। पूषा नो यथा वेदसामसद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये ॥ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्ष्यों अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभं यावानो विदथेषु जग्मयः । अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसागमन्निह ॥ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्‌गैस्तुष्टुवाः सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥ शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्रा नश्चक्रा जरसं तनूनाम्।
AUG 27, 2025 18:59 IST

आरती श्री गणपति जी: गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती लिरिक्स

आरती श्री गणपति जी: गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती लिरिक्स

गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।

तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।

धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।

सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।

लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।

श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।

देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।

पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।

चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं

पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।

सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
AUG 27, 2025 18:38 IST

Ganesh Chaturthi Evening Aarti Time

गणेश चतुर्थी पर शाम की आरती का समय शाम 7 से 7:30 बजे के बीच है।
AUG 27, 2025 18:01 IST

गणेश जी को खुश करने का मंत्र

"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"

किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले इस मंत्र का जप करने से काम में आने वाली सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
AUG 27, 2025 17:44 IST

गणेश जी को क्या क्या चढ़ता है

व्रत पारण के समय गणेश पूजा करते हुए आप भगवान गणेश जी को दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, जनेऊ, हल्दी, चंदन, दूर्वा, मोदक आदि चढ़ा सकते हैं। वहीं गणेश जी के भोग के लिए बूंदी के लड्डू और मोदक सबसे अच्छे माने जाते हैं।
AUG 27, 2025 17:21 IST

गणेश जी के 10 नाम

भगवान गणेश को उनके कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता है। जिसमें गणपति, विनायक, विघ्नहर्ता, एकदंत, लंबोदर, गजानन, सिद्धिविनायक, वक्रतुंड, धूम्रवर्ण, बालचंद्र प्रमुख हैं।
AUG 27, 2025 17:07 IST

गणेश जी का टूटा दांत किसका प्रतीक है?

गणेश जी का टूटा हुआ दांत ज्ञान, तपस्या, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। यह किसी कार्य के प्रति उनकी अटूट लगन और भक्ति को दर्शाता है।
AUG 27, 2025 16:49 IST

कितने दिन तक चलता है गणेश चतुर्थी का त्यौहार?

आज यानी 27 अगस्त से शुरु होने वाला गणेश चतुर्थी का त्यौहार अगले 10 दिन तक देश भर में पूरी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इन दिनों में आप देश में जगह- जगह शानदार गणपति पांडाल भी देख सकते हैं।
AUG 27, 2025 16:31 IST

गणेश जी की आरती - Ganesh Ji ki Aarti

जय गणेश देवा, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश देवा...

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश देवा...

हार चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश देवा...

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश देवा...

गणेश भगवान की जय, पार्वती के लल्ला की जय
AUG 27, 2025 16:02 IST

गणेश चतुर्थी का चांद देखना चाहिए या नहीं?



पौराणिक कथा की मानें तो, एक बार भगवान गणेश ने चंद्रमा को उसके अभिमान के कारण श्राप दिया था कि इस दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा को देखेगा, वह झूठे कलंक का भागी होगा। इसे "मिथ्या दोष" कहा जाता है। यही कारण है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन चांद को नहीं देखना चाहिए।
AUG 27, 2025 15:41 IST

गणेश चतुर्थी का चांद क्यों नहीं देखा जाता है

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश जी ने बहुत अधिक लड्डू खा लिए और अपने वाहन मूषक (चूहे) पर बैठकर कहीं जा रहे थे। मार्ग में अचानक मूषक एक सांप को देखकर डर गया और गिर पड़ा। इससे गणेश जी भी नीचे गिर गए और उनका पेट फट गया।

गणेश जी ने तुरंत उस सांप को पकड़कर अपने पेट पर बांध लिया। यह दृश्य चंद्र देव ने देखा तो वह जोर से हंस पड़े। इस पर गणेश जी ने क्रोधित होकर उनको श्राप दिया कि - आज से जो भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन तुम्हारा दर्शन करेगा, उसे मिथ्या कलंक (झूठा आरोप) लगेगा और उसकी बदनामी होगी।
AUG 27, 2025 14:52 IST

सुखकर्ता - दुःखहर्ता आरती

AUG 27, 2025 14:45 IST

गणेश चतुर्थी व्रत में क्या खाएं

गणेश चतुर्थी पर अगर आपने व्रत किया है तो फलाहार खाएं। सात्विक खाना खाएं। फल और दूध से बनी चीजों का सेवन करें।
AUG 27, 2025 14:40 IST

कलश को गणेश जी के किस ओर स्थापित करें

गणेश जी की मूर्ति या फोटो पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें। कलश को हमेशा गणेश जी के दाहिने हाथ की ओर रखना शुभ माना जाता है। यदि जगह कम हो तो कलश को गणपति जी के सामने दाईं ओर करके भी रख सकते हैं।
AUG 27, 2025 14:00 IST

गोदी में उठा लो मेरी मां गजानन छोटे हैं - गणेश जी के भजन लिरिक्स

गोदी में उठा लो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे पांव हैं,
घुंघरू पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे अंग हैं,
पीताम्बर पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे हाथ हैं,
कंगना पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा गला है,
माला पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे कान हैं,
कुण्डल पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा मुख है,
मोदक खिला दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा शीश है,
मुकुट पहना दो मेरी मां, गजानन छोटे हैं ।।
AUG 27, 2025 13:56 IST

क्या गणेश चतुर्थी पर नॉन वेज खा सकते हैं

अगर आपने गणेश चतुर्थी पर गणेश स्थापना नहीं की है तो भी आपको इस दिन नॉन वेज व अन्य तामसिक प्रवृति की चीजों से दूरी बनाकर रहना चाहिए। अगर आप गणेश जी का पूजन कर रहे हैं तो अपना आहार और विचार दोनों ही सात्विक रखें।
AUG 27, 2025 13:42 IST

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi, Aarti गणेश भगवान की आरती LIVE: मूर्ति स्थापना से पहले इन बातों को नज़रअंदाज़ न करें!

मूर्ति स्थापना के समय प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं भगवान की अंग पूजा अवश्य करें। अंग पूजा से ही भगवान की उस प्रतिमा में शक्ति का समन्वय होता है.

  • ॐ ब्रह्मा विष्णु रुद्र देवताभ्यो नमः । शिरसि ।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् । मुखे ।
  • ॐ प्राणाय देवताय नमः । हृदि ।
  • ॐ अं बीजाय नमः । गुह्ये ।
  • ॐ श्रीं शक्त्यै नमः । पादयोः ।
  • ॐ क्लीं कीलकाय नमः । सर्वांगेषु ।
इसके बाद पुनः पुष्प या दूर्वा से सभी अंगो का स्पर्श करें ।
AUG 27, 2025 13:25 IST

गणपति वंदना के लिए कौन सा श्लोक पढ़ें

गणपति वंदना के लिए श्लोक पढ़ सकते हैं -
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥