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Dussehra 2022 Date: दशहरा 2022 में कब है, जानिए पूजा का क्या रहेगा मुहूर्त

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  • Updated Oct 4, 2022, 05:43 AM IST

Dussehra Date, Vijayadashmi 2022 Date (दशहरा 2022 में कब है): ये पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक होता है। इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था। कुछ स्थानों पर ये त्यौहार विजयादशमी के नाम से जाना जाता है।

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Dussehra 2022 Date: दशहरा 2022 कब है

KEY HIGHLIGHTS
  • दशहरा पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है।
  • ये पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक होता है। इस दिन पुरूषोत्तम भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था।
  • दशहरा पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ का पुतला जलाकर भगवान राम की जीत का जश्न मनाया जाता है।

Dussehra 2022 Date: बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को विजयादशमी के रूप में भी जाना जाता है। कुछ लोग इस त्योहार को आयुध पूजा (शस्त्र पूजा) के रूप में भी मनाते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार इसी दिन पुरूषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध किया था। दशहरा पर्व अपराह्न काल में मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती है। इस बार दशहरा पर्व 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा। जानिए कैसे मनाया जाता है ये पर्व।

दशहरा पूजा (Dussehra Puja 2022)

1. घर की पूर्वोत्तर दिशा में कोई पवित्र और शुभ स्थान चुनें।

2. उस स्थान को स्वच्छ करें और चंदन के लेप के साथ अष्टदल चक्र बना लें।

3. अब ये संकल्प लें कि देवी अपराजिता की पूजा आप अपने या अपने परिवार की खुशहाली के लिए कर रहे हैं।

4. उसके बाद अष्टदल चक्र के बीच में 'अपराजिताय नमः' मंत्र के साथ माँ देवी अपराजिता का आह्वान करें।

5. इसके बाद मां जया को दायीं ओर 'क्रियाशक्त्यै नमः' मंत्र के साथ आह्वान करें।

6. मां अपराजिता की बायीं तरफ माँ विजया का 'उमायै नमः' मंत्र के साथ आह्वान करें।

7. इसके उपरांत अपराजिताय नमः, जयायै नमः और विजयायै नमः मन्त्रों के साथ विधि विधान पूजा करें।

8. मां से प्रार्थना करें, हे देवी माँ! मैनें आपकी पूजा सच्चे मन से और अपनी क्षमता के अनुसार संपूर्ण की है। कृपया मेरी ये पूजा स्वीकार करें।

9. पूजा संपन्न होने के बाद बाद मां को सच्चे मन से प्रणाम करें।

10. 'हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम।' मंत्र के साथ पूजा का विसर्जन करें।

दशहरा पर क्यों किया जाता है रावण दहन: पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने दस सिर वाले अत्याचारी रावण का वध किया था। तभी से रावण के पुतले को हर साल दशहरा के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतिक के रूप में जलाया जाता है। दशहरा पर दस सिर वाले रावण का दहन करने का मतलब है कि हम सभी अपने अंदर के क्रोध, लालच, भ्रम, नशा, ईर्ष्या, स्वार्थ, अन्याय, अमानवीयता एवं अहंकार को नष्ट करें।

दशहरा 2022 पूजा शुभ मुहूर्त

दशहरा 5 अक्टूबर 2022

विजय मुहूर्त - 02:07 पी एम से 02:54 पी एम

अपराह्न पूजा का समय - 01:20 पी एम से 03:41 पी एम

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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