Dasha Mata Vrat 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और परंपराएं हैं जिन्हें घर की सुख-समृद्धि और अच्छी किस्मत के लिए किया जाता है। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत दशा माता व्रत भी है। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता है और माना जाता है कि इससे घर की खराब दशा दूर होती है और जीवन में खुशहाली आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दशा माता का व्रत करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं, घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं। इस कारण कई जगहों पर महिलाएं इस व्रत को बहुत श्रद्धा और नियम के साथ करती हैं।
कौन हैं दशा माता (Dasha Mata Kaun Hai)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता को मां लक्ष्मी और मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। इन्हें घर की खुशहाली, सौभाग्य और अच्छी किस्मत देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि दशा माता अपने भक्तों की खराब किस्मत या जीवन की विपरीत परिस्थितियों को दूर कर अच्छी दशा प्रदान करती हैं। इस कारण लोग अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए इनका व्रत करते हैं।
कैसा है दशा माता का स्वरूप (Kaisa hai dasha Mata Ka swaroop)
दशा माता को ममतामयी और कल्याणकारी देवी के रूप में पूजा जाता है। माता की सवारी ऊंट है। इसके साथ ही उनके हाथों में त्रिशूल, तलवार आदि है। इन्हें सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से दरिद्रता और दुर्दशा को दूर करती हैं। कई जगहों पर दशा माता की पूजा पीपल के वृक्ष के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए इस दिन पीपल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
दशा माता व्रत क्यों रखा जाता है (Kyu Rakha Jata Hai Dasha Mata Vrat)
दशा माता व्रत मुख्य रूप से जीवन की खराब परिस्थितियों को दूर करने और अच्छी किस्मत के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हों या काम बार-बार बिगड़ रहे हों, तो इस व्रत को करने से स्थिति में सुधार आ सकता है।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि यह व्रत ग्रहों की खराब दशा या नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करता है। इसलिए कई लोग अपने परिवार की खुशहाली और उन्नति के लिए यह व्रत करते हैं।
2026 में कब रखा जाएगा दशा माता व्रत (Kab Rakha Jayega Dasha Mata Vrat)
पंचांग के अनुसार दशा माता का व्रत होली के बाद चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है। साल 2026 में यह व्रत 13 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर दशा माता की पूजा करती हैं और घर की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
दशा माता व्रत के लाभ (Dasha Mata Vrat Ke Labh)
मान्यता है कि दशा माता का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इससे जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। माना जाता है कि यह व्रत बिगड़े हुए कामों को भी बनने में मदद करता है और परिवार में शांति और खुशहाली बनी रहती है।
कैसे करें दशा माता की पूजा (Dasha Mata Ki Puja Vidhi)
दशा माता व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। इस व्रत में कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाया जाता है, जिसमें 10 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा के दौरान इस डोरे को पीपल के पेड़ पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद पीपल के वृक्ष की 10 बार परिक्रमा की जाती है और बिंदी, सिंदूर, फूल जैसी पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा के बाद यह डोरा गले में धारण किया जाता है, जिसे माता का आशीर्वाद माना जाता है।
राजा नल और दमयंती की की पढ़ी जाती है कथा
दशा माता व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि राजा नल और रानी दमयंती के जीवन में एक समय बहुत कठिन परिस्थितियां आ गई थीं। इसके बाद रानी दमयंती ने श्रद्धा के साथ दशा माता का व्रत किया, जिसके बाद उनकी खराब परिस्थितियां दूर हो गईं और उन्हें अपना खोया हुआ राज-पाट वापस मिल गया। इसी वजह से आज भी कई महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और अच्छी किस्मत के लिए दशा माता का व्रत करती हैं।
