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Dasha Mata Ki Aarti: दशा माता की आरती, जय सत-चित्त आनंद दाता की... दशामा की आरती लिरिक्स यहां देखें

Dasha Mata Ki Aarti, Dashama Ni Aarti Lyrics (दशा माता की आरती): आज दशा माता का व्रत है। कहते हैं इस व्रत को रखने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति में सुधार हो जाता है। आज के दिन दशा माता की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ कर आरती जरूर करनी चाहिए। यहां से आप दशा माता की आरती के लिरिक्स जान सकते हैं।

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दशा माता की आरती (pc: pinterest)

Dasha Mata Ki Aarti, Dashama Ni Aarti Lyrics (दशा माता की आरती): हिंदू धर्म में दशा माता की पूजा का खास महत्व है। पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर रखा जाता है। इस साल यह व्रत 13 मार्च को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन महिलाएं कच्चे सूत को 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और पीपल के पेड़ की पूजा करते हुए इस डोरा को गले में पहनती हैं। माना जाता है, कि इससे घर की खराब दशा सही होती है और दरद्रता का नाश होता है। आज दशा माता की पूजा के साथ आरती जरूर करें। दशामा की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए ये आरती बेहद फलदायी मानी जाती है। इस आरती को करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहां से आप दशा माता की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।

Dasha Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi (दशा माता आरती लिरिक्स इन हिंदी)-

आरती श्री दशा माता की।

जय सत-चित्त आनंद दाता की।

भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी।

पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी।

शुभ्र लोक में सदा विहारणी।

जय पालिनी दिन जनन की।

आरती श्री दशा माता की॥

अखिल विश्व- आनंद विधायिनी।

मंगलमयी सुमंगल दायिनी।

जय पावन प्रेम प्रदायिनी।

अमिय-राग-रस रंगरली की।

आरती श्री दशा माता की॥

नित्यानंद भयो आह्लादिनी।

आनंद घन आनंद प्रसाधिनी।

रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी।

सरस कमलिनी विष्णुआली की।

आरती श्री दशा माता की॥

दशा माता व्रत में क्यों पहना जाता है डोरा?

दशा माता के व्रत के दौरान खास डोरा पहनने का नियम होता है। इस पवित्र डोरे को धागे और रेशमी डोरे से भी बनाया जा सकता है। इसके लिए आप 10 धागों को जोड़कर एक डोरा बनाएं और उसमें 10 गांठें लगा लें। अब इस डोरे को माता के सामने रखें और आशीर्वाद लेकर पूजा के बाद पहन लें। माना जाता है, कि यह डोरा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता व्रत का समापन होने के बाद दशा माता की प्रतिमा नदी में विसर्जित करनी चाहिए।

क्या है डोरा खोलने का नियम?

दशा माता के व्रत के दिन आज जो डोरा पहनती हैं उसे खोलने के भी कुछ खास नियम हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र डोरे को कम से कम एक साल तक पहनना चाहिए। इसके अलावा आप इसे वैशाख महीने के किसी शुभ दिन में भी खोल सकते हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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