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Chitragupta Ji Ki Aarti: ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे... यहां देखें श्री चित्रगुप्त जी महाराज की आरती के हिंदी लिरिक्स

Chitragupta Ji Ki Aarti (चित्रगुप्त जी की आरती): आज चित्रगुप्त पूजा है और आज के दिन श्री चित्रगुप्त जी महाराज की पूरे विधि-विधान के साथ अराधना की जाती है। इसके बाद आरती करने का विधान है। यहां चित्रगुप्त पूजा की आरती, श्री चित्रगुप्त जी महाराज की आरती के लिरिक्स मौजूद हैं।

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श्री चित्रगुप्त जी महाराज आरती (pic credit: canva)

Chitragupta Ji Ki Aarti (चित्रगुप्त जी की आरती): कर्मों के लेखा-जोखा रखने वाले श्री चित्रगुप्त जी महाराज की आज के दिन पूजा की जाती है। आज 23 अक्टूबर को चित्रगुप्त पूजा है। हर साल ही ये पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन की जाती है। भगवान चित्रगुप्त इंसान के पाप पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। इसलिए इनकी पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। अगर आप भी चित्रगुप्त पूजा कर रहे हैं तो पूजा के बाद आरती जरूर करें। यहां से आप श्री चित्रगुप्त जी महाराज की आरती देख सकते हैं। यहां श्री चित्रगुप्त जी महाराज की स्तुति भी दी गई है।

चित्रगुप्त भगवान की आरती (Chitragupta Ji Ki Aarti)-

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।

भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।

भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।

मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी।

सृष्टि संहारण, जन दु:ख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

कलम, दवात, तलवार,पत्रिका, कर में अति सोहै।

वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

सिंहासन का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये।

तैंतीस कोटि देवता, चरणन में धाये॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा।

वेगि विलम्ब न लायो, इच्छित फल दीन्हा॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता।

जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं।

चौरासी के छूटैं बंधन, इच्छित फल पावैं॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी, पाप पुण्य लिखते।

हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

श्री चित्रगुप्त भगवान स्तुति (Chitragupta Ji Ki Stuti)

जय चित्रगुप्त यमेश तव ,शरणागतम ,शरणागतम|

जय पूज्य पद पद्मेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

जय देव देव दयानिधे ,जय दीनबंधु कृपानिधे |

कर्मेश तव धर्मेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

जय चित्र अवतारी प्रभो ,जय लेखनीधारी विभो |

जय श्याम तन चित्रेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

पुरुषादि भगवत् अंश जय ,कायस्थ कुल अवतंश जय |

जय शक्ति बुद्धि विशेष तव शरणागतम ,शरणागतम||

जय विज्ञ मंत्री धर्म के ,ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के |

जय शांतिमय न्यायेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

तव नाथ नाम प्रताप से ,छूट जाएँ भय त्रय ताप से |

हों दूर सर्व क्लेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

हों दीन अनुरागी हरि, चाहें दया दृष्टि तेरी |

कीजै कृपा करुणेश तव शरणागतम ,शरणागतम||

Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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