Chaturdashi October 2026: अक्टूबर में पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात शुरू होगी और 9 अक्टूबर की रात समाप्त होगी। वहीं, चतुर्दशी श्राद्ध शुक्रवार, 9 अक्टूबर को किया जाएगा। जानें चौदस की तारीख, तिथि का समय और इस दिन श्राद्ध करने से जुड़े जरूरी नियम।
पितृ पक्ष की चतुर्दशी 8 अक्टूबर को है या 9 अक्टूबर को? अगर आप चौदस श्राद्ध की तैयारी कर रहे हैं, तो नोट कर लें कि वर्ष 2026 में चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर, शुक्रवार को होगा। हालांकि, चतुर्दशी तिथि एक दिन पहले यानी 8 अक्टूबर की रात लग जाएगी। इसी वजह से दोनों तारीखों को लेकर उलझन हो सकती है।
तारीख के साथ इस दिन का नियम समझना भी जरूरी है। पितृ पक्ष में चौदस का श्राद्ध दूसरी तिथियों से कुछ अलग माना गया है। केवल किसी परिजन का निधन चतुर्दशी तिथि पर हुआ हो, तो उसी आधार पर इस दिन श्राद्ध तय नहीं किया जाता। मृत्यु की परिस्थिति और परिवार की परंपरा का भी ध्यान रखा जाता है।
अक्टूबर 2026 में चतुर्दशी कब से कब तक है
पितृ पक्ष की कृष्ण चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 को रात 10:15 बजे शुरू होगी। इसका समापन 9 अक्टूबर 2026 को रात 9:35 बजे होगा। ये समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं। नौ अक्टूबर को दिन के समय चतुर्दशी रहेगी और रात में अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी।
| चतुर्दशी की जानकारी | तारीख और समय |
|---|---|
| तिथि शुरू होने का समय | 8 अक्टूबर 2026, रात 10:15 बजे |
| तिथि समाप्त होने का समय | 9 अक्टूबर 2026, रात 9:35 बजे |
| चौदस श्राद्ध की तारीख | 9 अक्टूबर 2026 |
| चौदस श्राद्ध का वार | शुक्रवार |
यह जानकारी पितृ पक्ष की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के लिए है। इसलिए इसे अक्टूबर में आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से अलग समझें।
चौदस श्राद्ध 8 अक्टूबर को करें या 9 अक्टूबर को
चौदस श्राद्ध 9 अक्टूबर को किया जाएगा। आठ अक्टूबर को तिथि रात में शुरू हो रही है, जबकि अगले दिन श्राद्ध के लिए दिन के समय चतुर्दशी उपलब्ध रहेगी। Drik Panchang की भारत के लिए दी गई जानकारी में भी चतुर्दशी श्राद्ध का दिन 9 अक्टूबर बताया गया है।
दरअसल, अंग्रेजी तारीख और पंचांग की तिथि एक तरह से नहीं बदलतीं। तारीख रात 12 बजे बदल जाती है। हिंदू तिथि दिन या रात में किसी भी समय शुरू और समाप्त हो सकती है। इसलिए तिथि लगने की तारीख और धार्मिक कर्म करने का दिन अलग होना सामान्य बात है।
चतुर्दशी श्राद्ध क्या होता है
चतुर्दशी श्राद्ध को चौदस श्राद्ध, घात चतुर्दशी और घायल चतुर्दशी भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह दिन खास तौर पर उन दिवंगत परिजनों के लिए रखा गया है, जिनकी मृत्यु दुर्घटना, हत्या, हथियार या अन्य असामान्य परिस्थितियों में हुई हो। उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करके शांति की प्रार्थना की जाती है।
चतुर्दशी श्राद्ध की तैयारी कैसे करें
सबसे पहले पुरोहित से सामग्री, विधि और स्थानीय समय की जानकारी लें। इसके बाद भोजन और बाकी व्यवस्था की सूची बनाएं। घर के लोगों के बीच काम बांट देंगे तो किसी एक व्यक्ति पर सारा दबाव नहीं आएगा।
तैयारी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- जरूरी सामग्री की सूची पहले लिख लें।
- भोजन की व्यवस्था कितने लोगों के लिए करनी है, यह तय करें।
- परिवार के बुजुर्गों से घर की पुरानी परंपरा पूछ लें।
- दान और भोजन का खर्च अपनी क्षमता के अनुसार रखें।
- दिवंगत परिजन का नाम और जरूरी पारिवारिक जानकारी तैयार रखें।
चौदस श्राद्ध का समय देखते हुए क्या ध्यान रखें
श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का महत्व बताया गया है। इनका समय स्थान के अनुसार बदलता है। इसलिए ऑनलाइन पंचांग में समय देखते हुए चुना गया शहर जरूर जांचें। किसी दूसरे देश का स्थानीय समय भारत में इस्तेमाल करने से तारीख और समय की उलझन हो सकती है।
