Chandra Arghya Samagri, Vidhi (चंद्रमा को अर्घ्य कैसे देते हैं): शरद पूर्णिमा पर चंद्र अर्घ्य का महत्व आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद प्रभावशाली है। आज की रात का चंद्रमा दिव्यता, शांति और चेतना का प्रतीक होता है। चंद्रदेव को अर्घ्य देने का मतलब है उन्हें जल समर्पित करना और इससे आत्मशुद्धि होती है और अंतर्मन की शांति मिलती है। चंद्रमा मन के अधिपति हैं और जब व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ उन्हें अर्घ्य देता है, तो वो अपनी चंचलता और अशांति को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सामने समर्पित करता है। शरद पूर्णिमा की चांदनी में अर्घ्य देना आत्मा को निर्मल करने जैसा है। इस दिन चांद को अर्घ्य देने के लिए मुहूर्त देखा जाता है और फिर पूरी विधि के साथ अर्घ्य दिया जाता है। यहां से आप चंद्र अर्घ्य देने के लिए क्या-क्या सामान लगता है, उसकी लिस्ट देख सकते हैं और चंद्र अर्घ्य देने की विधि भी जान सकते हैं।
चंद्र अर्घ्य देने का समय
- चंद्र अर्घ्य सामग्री सूची
- तांबे/चाँदी/स्टील का लोटा या कलश
- शुद्ध जल
- दूध की कुछ बूंदें या केसर
- साफ चावल
- सफेद फूल
- शक्कर
- रोली
- दीपक
चंद्र देव को अर्घ्य देने की विधि क्या है?
- जब चंद्रमा स्पष्ट रूप से आकाश में दिखाई दे, उसी समय अर्घ्य देना श्रेष्ठ होता है।
- एक तांबे, स्टील या चाँदी के लोटे/कलश में शुद्ध जल भरें।
- उसमें कुछ साफ चावल, सफेद फूल या बेलपत्र, थोड़ी सी शक्कर और केसर या दूध की बूंदें डालें।
- पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
- चंद्रमा को कुछ क्षण एकाग्र होकर नमन करें।
- दोनों हाथों से जल पात्र लेकर धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर जल अर्पित करें, इस भाव से कि आप मन, तन और जीवन की शुद्धि के लिए यह कर रहे हैं।
- अर्घ्य देते हुए ॐ चंद्राय नमः का जाप करें।
ध्यान दें-
शरद पूर्णिमा के दिन आप चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए सिर्फ सादा जल नहीं चढ़ा सकते हैं।
