Navratri 1st Day Puja Vidhi, Vrat Katha, Mantra, Bhog Live Update: जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ यहां
Navratri 1st Day Puja Vidhi, Vrat Katha, Mantra, Bhog Live Update: जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ यहां
नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें घट स्थापना? यहां जानिए शुभ मुहूर्त और विधि
मां शैलपुत्री पूजा विधि (Maa Shailputri Puja Vidhi)
नवरात्रि के पहले दिन सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। कलश स्थापना और व्रत संकल्प के बाद माता की विधि विधान पूजा शुरू करें। पूजा स्थल पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर माता की प्रतिमा रखें। मां को धूप दीप दिखाएं, फूल अर्पित करें। प्रसाद के रूप में देवी मां को फल और मिठाई अर्पित करें।
मां शैलपुत्री मंत्र (Maa Shailputri Mantra)
-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
Navratri Day 1 Katha
मां शैलपुत्री भोग (Maa Shailputri Bhog)
मां शैलपुत्री को सफेद वस्तु बहुत प्रिय है, इसलिए नवरात्रि के पहले दिन माता को सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता को सफेद फूल अर्पित करने चाहिए।
नवरात्रि में चाय पीना चाहिए
शैलपुत्री माता मंत्र (Shailputri Mata Mantra)
शैलपुत्री माता आरती (Shailputri Mata Aarti)
Navratri First Day Puja Vidhi (नवरात्रि प्रथम दिन पूजा विधि)
Navratri 1st Day Katha (नवरात्रि पहले दिन की कथा)
Navratri First Day Mantra: नवरात्रि के पहले दिन की पूजा का मंत्र
2- वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
Navaratri 2024 Kalash Sthapana (Ghat sthapana) Shubh Muhurat City Wise Time: कलश स्थापना मुहूर्त
- नई दिल्ली06:02 AM से 10:16 AM11:57 AM से 12:48 PM
- मुंबई06:26 AM से 10:35 AM12:15 PM से 01:05 PM
- नोएडा06:01 AM से 10:15 AM11:56 AM से 12:47 PM
- बेंगलुरु01:11 AM से 10:18 AM11:56 AM से 12:46 PM
- चेन्नई06:00 AM से 10:07 AM11:46 AM से 12:35 PM
- अहमदाबाद06:24 AM से 10:34 AM12:16 PM से 01:06 PM
- हैदराबाद06:00 AM से 10:07 AM11:45 AM से 12:36 PM
- कोलकाता05:22 AM से 09:33 AM11:13 AM से 12:03 PM
- जयपुर06:09 AM से 10:22 AM12:03 PM से 12:54 PM
- पुणे06:22 AM से 10:31 AM12:11 PM से 01:01 PM
- सूरत06:22 AM से 10:35 AM12:15 PM से 01:05 PM
- कानपुर05:51 AM से 10:04 AM11:45 AM से 12:36 PM
गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
एकदंत दयावंत चारभुजाधारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश...
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजै सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
कलश स्थापना के नियम (Kalash Sthapana Ke Niyam)
Navratri Day Color: नवरात्रि के पहले दिन का रंग
मां शैलपुत्री का स्वरूप
शैलपुत्री पूजा मंत्र (Maa Shailputri Mantra)
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
-शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी
पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी
रत्नयुक्त कल्याणकारिणी
-ओम् ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
-बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:
-वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्
मां शैलपुत्री आरती (Maa Shailputi Aarti)
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
Chaitra Navratri 2024 Day 1 Katha: मां शैलपुत्री व्रत कथा
सती ने अपने पति यानी भगवान शिव से पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने की इच्छा ज़ाहिर की। सती के आग्रह पर भगवान शंकर ने उन्हें जाने दिया। जब सती यज्ञ में पहुंचीं, तो केवल उनकी मां से ही उन्हें स्नेह मिला। उनकी अपनी बहनों की बातें व्यंग्य और उपहास से भरी प्रतीत हुईं। सती के पिता दक्ष ने भरे यज्ञ में भगवान शंकर के बारे में अपमानजनकर बातें कहीं।
सती ने जब अपने पिता के मुख से अपने पति के लिए बुरी बातें सुनीं तो वे ये अपमान सहन नहीं कर पाईं और यज्ञ वेदी मे कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। कहते हैं इसके बाज सती का अगला जन्म शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में हुआ और वे शैलपुत्री कहलाईं। कहते हैं शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शिव से हुआ था।
