Bhishma Niti In Hindi: भीष्म पितामह महाभारत के महान योद्धा थे। उनको गंगा पुत्र भीष्म के नाम से भी जाना जाता है। वो महाराज शांतनु और देवी गंगा के पुत्र थे। उनके कंधो पर पूरे हस्तिनापुर की रक्षा की जिम्मेदारी थी। महाभारत के युद्ध में उनकी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। भीष्म ने बाणों की शौय्या पर लेटकर युधिष्ठिर को बहुत सारी नीति संबंधी बाते बताई हैं। उन्होंने स्त्रि को लेकर भी बहुत कुछ खास बात बताई है। जिन्हें आपको जरूर जानना चाहिए। आइए जानते हैं स्त्रि को लेकर उन्होंने क्या कहा है।
स्त्रियों को लेकर भीष्म पितामह ने बताई ये बातें
स्त्रि को रखें प्रसन्न
भीष्म ने युधिष्ठिर को स्त्रि को लेकर कहा कि जिस घर में स्त्रि प्रसन्न होती हैं। वहां लक्ष्मी का वास होता है। जिस घर में स्त्रि दुखी होती है,जहां उसका सम्मान नहीं होता है। वहां पर दरिद्रता का वास होता है। जहां पर किसी भी महिला को कटुवचन बोले जाते हो दुख दिया जाता हो। वहां से देवता भी चले जाते हैं।
महिला का सम्मान
भीष्म नीति के अनुसार स्त्रियों को हर जगह पर सम्मान मिलना चाहिए। कभी भी किसी महिला का के अधिकारों का हनन नहीं करना चाहिए। जिस जगह पर महिला का सम्मान होता है। वहां पर वो सशक्त होती है। यत्र नार्येस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवताः।। जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता विराजते हैं।
महिला नहीं सताना चाहिए
भीष्म के अनुसार व्यक्ति को कभी ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए। जिससे किसी भी स्त्रि को श्राप भोगना पड़े। कभी भी किसी स्त्रि की हाय नहीं लेनी चाहिए। उनकी हाय हमेशा विनाश का कारण बनती है। स्त्री, बालक, बालिका, गौ और असहाय को कभी भी नहीं सताना चाहिए। इनका श्राप लगने से विनाश ही होता है।
