अध्यात्म

क्यों साथ होता है डमरू और त्रिशूल, जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य?

Bhagwan Shiv Trishul Damru Meaning : आपने अक्सर भगवान शिव के हाथ में डमरू और त्रिशूल देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका अर्थ क्या है। क्यों डमरू और त्रिशूल एक साथ होते हैं।

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भगवान शिव क्यों रखते हैं डमरू और त्रिशूल

Bhagwan Shiv Trishul Damru Meaning : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री हाथ में त्रिशूल और डमरू लिए नजर आए। यह केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं था, बल्कि भगवान शिव की गहरी आध्यात्मिक परंपरा और दर्शन को दर्शाने वाला क्षण था।

भगवान शिव के साथ हमेशा त्रिशूल और डमरू को देखा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये दोनों एक साथ ही क्यों होते हैं और इनका असली अर्थ क्या है? दरअसल, इसके पीछे बहुत गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण छिपा हुआ है।

त्रिशूल का अर्थ (2)

त्रिशूल का अर्थ (2)

तीन शक्तियों पर नियंत्रण है त्रिशूल

धार्मिक ग्रंथों जैसे शिव पुराण और स्कंद पुराण में त्रिशूल को केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि तीन महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतीक बताया गया है।

पहला अर्थ शरीर के तीन दोष कफ, वात और पित्त है। आयुर्वेद में माना गया है कि इन्हीं तीन दोषों के असंतुलन से बीमारियां उत्पन्न होती हैं। भगवान शिव इन तीनों दोषों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं, इसलिए उन्हें रोगों से परे और योगियों के गुरु माना जाता है।

दूसरा अर्थ त्रिगुण सत्व, रज और तम है। ये तीनों गुण हमारे स्वभाव और जीवन को नियंत्रित करते हैं। जब कोई व्यक्ति इन तीनों पर नियंत्रण पा लेता है, तो वह गुणों से परे होकर एक उच्च अवस्था में पहुंच जाता है। भगवान शिव को ‘गुणातीत’ इसी कारण कहा गया है।

तीसरा अर्थ समय से जुड़ा है- भूत, वर्तमान और भविष्य। त्रिशूल यह दर्शाता है कि शिव तीनों कालों के स्वामी हैं। इसी वजह से उन्हें महाकाल भी कहा जाता है।

सृष्टि की ध्वनि और आनंद है डमरू

डमरू की बात करें तो स्कंद पुराण और शिव पुराण में डमरू को आनंद और सृष्टि की शुरुआत का प्रतीक बताया गया है।

मान्यता है कि जब भगवान शिव डमरू बजाते हैं, तो उससे ‘अनाहत नाद’ यानी ब्रह्मांडीय ध्वनि उत्पन्न होती है। यही ध्वनि सृष्टि के निर्माण की शुरुआत मानी जाती है। डमरू का आकार भी खास होता है, जो ब्रह्मांड के फैलाव और संकुचन (creation and destruction) को दर्शाता है।

डमरू केवल ध्वनि का प्रतीक नहीं, बल्कि उस परम आनंद का संकेत है, जो तब मिलता है जब व्यक्ति अपने भीतर की शांति और ईश्वर का अनुभव कर लेता है। शिव की समाधि और डमरू की ध्वनि इसी आनंद का प्रतीक मानी जाती है।

डमरू का अर्थ (1)

डमरू का अर्थ (1)

त्रिशूल और डमरू एक साथ क्यों?

अब सबसे अहम सवाल—ये दोनों हमेशा साथ ही क्यों होते हैं? त्रिशूल विनाश, नियंत्रण और संतुलन का प्रतीक है, जबकि डमरू सृजन, ऊर्जा और आनंद का प्रतीक है। जब ये दोनों साथ होते हैं, तो यह संदेश देते हैं कि जीवन में विनाश और सृजन दोनों जरूरी हैं। भगवान शिव को सृष्टि का संहारक कहा जाता है, लेकिन वही नए सृजन के भी आधार हैं। त्रिशूल यह दिखाता है कि शिव नकारात्मकता, दुख और अज्ञान का नाश करते हैं, जबकि डमरू यह बताता है कि उसी के बाद नई ऊर्जा, नई शुरुआत और आनंद आता है।

शरीर और योग से भी जुड़ा है संबंध

त्रिशूल को योग विज्ञान में शरीर की तीन मुख्य नाड़ियों इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना का प्रतीक भी माना जाता है। जब ये तीनों नाड़ियां संतुलित होती हैं, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। डमरू की ध्वनि को ध्यान और योग में ऊर्जा जागरण से भी जोड़ा जाता है। यानी त्रिशूल शरीर के संतुलन का और डमरू चेतना के जागरण का संकेत है।

क्या कहता है आयुर्वेद?

चरक संहिता में भी कफ, वात और पित्त को सभी रोगों का मूल कारण बताया गया है। जब ये संतुलित रहते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है। भगवान शिव का त्रिशूल इन तीनों दोषों पर नियंत्रण का प्रतीक है, जो एक स्वस्थ और संतुलित जीवन का संकेत देता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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