अध्यात्म

Bhagwad Geeta: गीता के इन 5 श्लोकों का जाप शत्रु पर दिलाएगा विजय

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 24, 2023, 12:07 PM IST

Bhagwad Geeta Shlok In Hindi: श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए कई उपदेश दिए हैं। गीता के एक श्लोक के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में भय रहेगा उसे सफलता कभी नहीं मिल सकती। इसलिए व्यक्ति को निडर होना चाहिए।

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Bhagwat Geeta Shlok In Hindi: गीता के श्लोक

Bhagwad Geeta Shlok In Hindi: सनातन धर्म में श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष महत्व माना जाता है। ये हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथों में से एक है। इस ग्रंथ में भगवान कृष्ण ने जो दिव्य उपदेश दिए हैं उन्हें पढ़ने मात्र से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। गीता के श्लोकों में मनुष्य जीवन की सभी परेशानियों का निवारण छिपा है। आज यहां हम आपको बताएंगे भगवद्गीता के कुछ ऐसे श्लोकों के बारे में जिनके जाप से आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। इन श्लोकों के प्रभाव से दुश्मन घुटनों के बल आ जाता है। जानते हैं ये कौन से श्लोक हैं।

Bhagwat Geeta Shlok In Hindi

1. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

इस श्लोक में कहा गया है व्यक्ति को फल की बजाय अपने कर्म पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जब व्यक्ति फल की इच्छा से कर्म करता है तो उसका ध्यान अपने कर्म पर कम बल्कि उससे मिलने वाले फल पर ज्यादा होता है। इसलिए अपने शत्रु को हराने के लिए खुद को आगे कैसे बढाएं इस पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

2. क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।

स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।

इस श्लोक में मन को शांत रखने का महत्व बताया गया है। अगर व्यक्ति का मन शांत होगा तो वो हर स्थिति में स्थिर रह सकेगा और यही स्थिरता उसके विवेक को जागृत करने का काम करेगी। जिससे वह अपनी सूज-बूझ के साथ बिना क्रोध किए कोई निर्णय ले पाएगा। इसलिए शत्रु के समक्ष भी अपने मन को शांत रखना चाहिए। तभी आप अपने दुश्मन को मात दे सकेंगे।

3. अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।

नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः।।

इस श्लोक के अनुसार जरूरत से ज्यादा किसी भी चीज पर शक करना व्यक्ति को असफलता दिला सकता है। यही बात इस स्थिति में भी लागू होती है कि अगर आपका दुश्मन आपसे हाथ मिलाना चाहता है तो आप सतर्क जरूर बरतें लेकिन जरूरत से ज्यादा संदेह भी न करें। नहीं तो दुश्मनी और बढ़ जाएगी।

4. ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

इस श्लोक में कहा गया है कि किसी भी वस्तु से लगाव होना साधारण बाता है लेकिन जरूरत से ज्यादा लगाव होना व्यक्ति को सफलता पाने में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यही बात इस रूप में भी लागू होती है कि अगर किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान को छोड़ देने पर आपसी बैर कम या खत्म हो सकता है तो इस रास्ते को तुरंत अपना लें।

5. हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।

तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥

इस श्लोक के अनुसार जब तक व्यक्ति के मन में भय रहेगा उसे सफलता नहीं मिल सकती। इसलिए अपने शत्रु से डरने की बजाय निडर होकर अपना कर्म करते रहें अगर आप सही हैं तो आपका दुश्मन खुद ब खुद आपके सामने झुक जाएगा।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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