शब-ए-बारात पर बेर के पत्तों से क्यों नहाते हैं, जानिए इस्लाम में बेर का पेड़ क्यों है महत्वपूर्ण?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 3, 2026, 06:35 PM IST
Shab E Barat Par Beri Ke Patto se Kyo Nahate Hai: शब-ए-बारात इस्लाम धर्म में बेहद रात मानी गई है। माना जाता है कि इस रात को अपने गुनाहों की माफी अल्लाह से मांगना चाहिए। अल्लाह इस रात अपने बंदों को गुनाहों के लिए माफ करता है। इसी के साथ यह भी माना जाता है कि अगर इस दिन मगरिब की नमाज के बाद बेर के पत्तों का एक छोटा सा उपाय कर लिया जाए तो व्यक्ति पूरे साल हर प्रकार की बुरी नजर, जादू, टोने से दूर रहता है आइए जानते हैं कि बेर के पत्ते का क्या उपाय इस दिन करना चाहिए?
शबे बारात पर बेर के पत्तों से क्यों नहाएं?
Shab E Barat Par Beri Ke Patto se Kyo Nahate Hai: शब-ए-बारात इस्लाम में इबादत, तौबा और अल्लाह से माफी मांगने की रात मानी जाती है। इस रात को बेहद पवित्र माना गया है। साल 2026 में 3 फरवरी की रात ही शबे बारात है। इस्लामिक जानकारों की मानें तो इस दिन बेर के पत्तों का एक उपाय अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन बेर के पत्तों का उपाय करने से सभी प्रकार का जादू, टोना और बुरी नजर दूर हो जाती है। बेर के पत्तों का इस्लाम में काफी पवित्र माना गया है। इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि यह पेड़ जन्नत से आया है।
बेर के पत्तों के पानी से क्यों नहाएं?
इस्लाम में बेर के पेड़ का जिक्र कुरआन में सिद्र नाम से आता है, जो जन्नत से जुड़े संदर्भ में बताया गया है। इसी वजह से बेर के पेड़ को पाक और बरकत से जुड़ा हुआ माना गया। इस कारण बेर के पत्ते बेहद ही शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ये पत्ते काफी शुद्ध होते हैं और इन्हें सफाई के काम में इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
क़ुरआन में सिद्रतुल मुंतहा का जिक्र मिलता है, जो जन्नत से जुड़ा हुआ एक विशेष वृक्ष माना जाता है। सिद्र यानी बेर का पेड़ बरकत, पाकीजगी और रहमत का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से बेर के पत्तों को शुद्ध और मुबारक समझा जाता है।
बेर के पत्तों के पानी से कैसे नहाएं और इसके लाभ क्या हैं?
मान्यता है कि शबे बारात में मगरिब की नमाज के बाद बेर के सात पत्तों को पानी में डालकर हल्का गर्म करना चाहिए। इसके बाद इस पानी से गुसल करना चाहिए यानी नहाना चाहिए। इससे जादू-टोना, बुरी नजर और नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाते हैं। इसी वजह से कई लोग इसे सुरक्षा कवच की तरह मानते हैं और शबे बारात पर यह अमल करते हैं। मान्यता है कि यह गुस्ल इंसान के आसपास मौजूद बुरी ऊर्जा को दूर कर देता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।
स्किन की बीमारी और डैंड्रफ से मिलती है राहत
इस्लामिक जानकारों के अनुसार, बेर के पत्तों से गुस्ल करने से स्किन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। जिन लोगों को खुजली, दाने या स्किन एलर्जी जैसी परेशानी होती है, वे इस गुस्ल को फायदेमंद मानते हैं। इसके अलावा बालों में डैंड्रफ की समस्या से परेशान लोग भी इस पानी से सिर धो सकते हैं। मान्यता है कि बेर के पत्तों का पानी शरीर को ठंडक देता है और त्वचा व बालों को साफ रखने में मदद करता है।
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