शब-ए-बारात की नमाज कब पढ़ें, जानिए नमाज और फातिहा पढ़ने का क्या है समय?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 3, 2026, 06:37 PM IST
Shab E Barat Ki Namaz Kab Padhe: शब-ए-बारात उन पवित्र रातों में से है, जिनमें अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है। इस रात को अल्लाह की रहमत बरसती है। यह रात गुनाहों से तौबा करने और रब से दुआ मांगने का मौका होता है। इस रात की इबादत का अहम हिस्सा नफल की नमाज़ है। आइए जानते हैं यह इस रात नमाज़ कब पढ़नी चाहिए ?
शबे बारात की नमाज कब पढ़ें
Shab E Barat Ki Namaz Kab Padhe: शब-ए-बारात इस्लाम की उन मुक़द्दस रातों में से एक मानी जाती है, जब अल्लाह की रहमत और मगफिरत के दरवाज़े खुले रहते हैं। साल 2026 में यह रात 3 फरवरी को है। यह रात गुनाहों से तौबा करने, अपने रब के सामने झुकने और दिल से दुआ मांगने का खास मौका होती है।
इसी वजह से इस्लाम को मानने वाले इस रात नफिल नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआ में वक्त गुज़ारते हैं। शबे बारात की इबादत का सबसे अहम हिस्सा नफिल नमाज़ है, जिसे ईशा के बाद से लेकर फजर से पहले तक पढ़ा जाता है। ऐसे में जानना ज़रूरी हो जाता है कि शबे बारात की नमाज़ कब पढ़नी चाहिएय़
शब-ए-बारात 2026 की तारीख और रात का समय
चांद के हिसाब से साल 2026 में 3 फरवरी 2026 को शब-ए-बारात है। इस्लाम में रात की शुरुआत मग़रिब की नमाज़ के बाद से मानी जाती है, इसलिए शबे बारात की इबादत 3 फरवरी 2026 की ईशा की नमाज के बाद शुरू होकर 4 फरवरी 2026 की फजर से पहले तक की जाएगी।
शब-ए-बारात की नमाज़ कब पढ़ी जाएगी?
शब-ए-बारात की नमाज़ का कोई तय एक वक्त नहीं है, बल्कि यह पूरी रात पढ़ी जा सकती है। इस्लाम में रात की शुरुआत मग़रिब की नमाज़ के बाद से मानी जाती है। इसी वजह से शब-ए-बारात की नफ्ल नमाज़ मग़रिब के बाद से लेकर फजर की नमाज़ से पहले तक किसी भी समय पढ़ी जा सकती है।
अक्सर लोग ईशा की नमाज़ अदा करने के बाद नफ्ल नमाज़ पढ़ते हैं। कई लोग रात के आखिरी हिस्से, यानी तहज्जुद के वक्त भी इबादत करते हैं। यह माना जाता है कि रात का आखिरी हिस्सा दुआ और इबादत के लिए ज्यादा बेहतर होता है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि उसी वक्त इबादत की जाए।
क्या है शब-ए-बारात?
शबे बारात इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक महीने की 14वीं और 15वीं रात के बीच वाली रात होती है। इस रात को रहमत, मगफिरत और दुआ की रात माना जाता है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआ सुनते हैं और गुनाहों की माफी का दरवाज़ा खुला रहता है। इसी वजह से मुसलमान इस रात इबादत, नफिल नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआ में वक्त गुज़ारते हैं।
क्या शब-ए-बारात की कोई अलग फर्ज़ नमाज़ होती है?
शब-ए-बारात की रात कोई अलग फर्ज़ नमाज़ नहीं होती है। इस रात जो नमाज़ अदा की जाती है, वह नफ्ल नमाज़ होती है। नफ्ल नमाज़ अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी खुशी से पढ़ी जाती है। इसे ज़रूरी या फर्ज़ नहीं माना जाता है।
नमाज़ के बाद क्या करना चाहिए?
नफिल नमाज़ के बाद इस रात में कुरान की तिलावत, ज़िक्र और दुआ करना बहुत अहम माना जाता है। इस वक्त अपने गुनाहों की माफी मांगना, अपने लिए, अपने मां-बाप, परिवार और पूरी उम्मत के लिए दुआ करना बेहतर होता है।
कई लोग इस रात अल्लाह की तारीफ में 'सुब्हानअल्लाह', 'अल्हम्दुलिल्लाह' और 'अल्लाहु अकबर' जैसे ज़िक्र करते हैं। इसके साथ ही अपने दिल से सच्ची तौबा करते हैं।
शबे बारात पर दुआ का महत्व
शब-ए-बारात की इबादत का असल मकसद सच्चे दिल से अल्लाह से माफी मांगना होता है। नफ्ल नमाज़, कुरान की तिलावत, फातिहा और दुआ सब अल्लाह की रज़ा के लिए की जाती है। इस रात इंसान को अपने गुनाहों से तौबा करनी चाहिए और बेहतर ज़िंदगी की दुआ करनी चाहिए। शबे बारात की रात को दुआ की रात भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआ सुनते हैं और बहुत से लोगों की मगफिरत होती है। इसलिए इस रात दुनियावी जरूरतों के साथ-साथ आख़िरत की भलाई के लिए भी दुआ करनी चाहिए। दुआ किसी एक खास भाषा या लफ्ज़ों तक सीमित नहीं है। इंसान अपनी ज़ुबान और दिल की बात अल्लाह से सीधे कह सकता है।
शब-ए-बारात की फातिहा कब पढ़ें?
शब-ए-बारात की फातिहा रात के किसी भी हिस्से में पढ़ी जा सकती है। इसे मग़रिब के बाद, ईशा के बाद या तहज्जुद के वक्त पढ़ा जा सकता है। फातिहा पढ़ने का मकसद अल्लाह से मगफिरत की दुआ करना और अपने मरहूम रिश्तेदारों के लिए रहमत की दुआ करना होता है।
शबे बारात में क्या ध्यान रखना चाहिए?
शबे बारात की इबादत का मकसद दिखावा नहीं बल्कि खालिस नीयत होनी चाहिए। नफिल नमाज़, दुआ और ज़िक्र उतना ही करें जितना आसानी से हो सके। इस रात को फर्ज़ समझकर कोई ऐसी चीज़ न करें जो इस्लाम में ज़रूरी न हो। सबसे अहम बात यह है कि इंसान सच्चे दिल से अल्लाह से जुड़ने की कोशिश करे।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।