अध्यात्म

कैसा बेलपत्र चढ़ाने करने से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव, जानिए डंडी या बिना डंडी का, कौन सा बेलपत्र करें अर्पित?

Belpatra Niyam: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को बेलपत्र अर्पित करना काफी शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे भगवान शिव जल्द ही प्रसन्न होते हैं। हालांकि शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। आइए जानते हैं कि बेलपत्र अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बेलपत्र कैसे अर्पित करें?

बेलपत्र कैसे अर्पित करें?

Belpatra Niyam: भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। सावन का महीना हो, सोमवार का व्रत हो या महाशिवरात्रि, शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में बेलपत्र को शिवजी का अत्यंत प्रिय पत्र बताया गया है, लेकिन इसे चढ़ाने और तोड़ने के कुछ नियम भी बताए गए हैं। अगर इन नियमों का ध्यान न रखा जाए तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कि भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बिना डंडी वाले बेलपत्र का करें उपयोग

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय डंडी यानी डंठल को हटाकर ही अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि डंडी सहित बेलपत्र चढ़ाना उचित नहीं माना जाता है। डंडी वाला हिस्सा भगवान शिव पर वज्र समान लगता है। इसके साथ ही बेलपत्र को अर्पित करते समय चिकना वाला हिस्सा शिवलिंग की ओर और कठोर वाला ऊपर की ओर रखना चाहिए। इससे पूजा शास्त्रसम्मत मानी जाती है और शिवजी प्रसन्न होते हैं।

ये बेलपत्र नहीं करने चाहिए अर्पित?

शिव पूजा में हमेशा साफ, ताजा और साबुत बेलपत्र ही अर्पित करना चाहिए। कटा-फटा, छेद वाला या कीड़े लगा हुआ बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। इसी तरह सूखा, मुरझाया या पीले रंग का बेलपत्र भी अर्पित नहीं करना चाहिए। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए एकल पत्ती या टूटा हुआ बेलपत्र भी चढ़ाने से बचना चाहिए। पूजा में हमेशा हरे और ताजे बेलपत्र का ही उपयोग करना श्रेष्ठ माना गया है। वहीं, तीन से अधिक पत्तियों वाला बेलपत्र औऱ भी अधिक शुभ माना गया है।

किन दिनों बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ तिथियों पर बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इसके अलावा चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन भी बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए। इन दिनों बेलपत्र के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है, लेकिन पत्ते तोड़ना उचित नहीं समझा जाता है।

बेलपत्र चढ़ाने के क्या हैं नियम?

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इसमें हमेशा तीन या इससे अधिक पत्तों वाला बेलपत्र चुनें और उसे साफ पानी से धोकर ही अर्पित करें। बेलपत्र को उल्टा इस प्रकार रखें कि उसका चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे। इसे 3, 7, 11 या 21 की विषम संख्या में चढ़ाना शुभ माना जाता है।

बेलपत्र अर्पित करते समय ‘त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्, त्रिजन्मपाप संहारं एक बिल्वं शिवार्पणम्॥’ या ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। पहले शिवलिंग का जलाभिषेक करें और उसके बाद बेलपत्र चढ़ाएं। यदि ताजा बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पहले से चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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