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Basant Panchami Katha In Hindi: बसंत पंचमी पर जरूर पढ़ें मां सरस्वती के जन्म की पावन कथा

Basant Panchami Katha in Hindi (बसंत पंचमी कथा हिंदी में): बसंत पंचमी के दिन मां शारदा की आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से माता सरस्‍वती अत्यंत ही प्रसन्न होती हैं और विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं। ऐसे में आज हम आपको माता सरस्वती से जुड़ी रोचक कथा बताएंगे, जिसे बसंत पंचमी के व्रत में पढ़ना बहुत फलदायी होत्ता है।

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Basant Panchami Vrat Katha In Hindi

Basant Panchami Katha in Hindi (बसंत पंचमी कथा हिंदी में): ज्ञान, बुद्धि, विवेक और संगीत की देवी माता सरस्वती के पूजन का दिवस जिसे बसंत पंचमी या सरस्वती पूजन कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन के उत्सव के मुख्यतः दो कारण हैं, पहला माता सरस्वती का जन्म दिवस और दूसरा बसंत ऋतु की शुरुआत। इस दिन मुख्य रूप से माता सरस्वती की पूजा की जाती है। श्रद्धालु उपवास रखते हैं और पूजा के समय बसंत पंचमी की कथा भी जरूर सुनते हैं। चलिए आपको बताते हैं बसंत पंचमी की व्रत कथा।

Basant Panchami Katha in Hindi (बसंत पंचमी कथा हिंदी में)

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती परम ब्रह्म के प्रकृति रूप में अवतरित हुई थीं। कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा संसार का भ्रमण करने निकले, तो उन्हें समस्त संसार उदास नजर आया, हर तरफ घोर शांति छाई हुई थी। ये देखकर ब्रह्माजी को लगा कि संसार की रचना करते हुए शायद कोई कमी रह गई है। भगवान ब्रह्मा एक स्थान पर रुके और अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का। तब अलौकिक‍ ज्योति पुंज के साथ एक देवी प्रकट हुईं। देवी के हाथ में वीणा और चेहरे पर अत्यंत ही तेज झलक रहा था। ये देवी मां सरस्वती थीं। उन्होंने ब्रह्मा जी को प्रणाम किया ज‍िसके उपरांत ब्रह्माजी ने माता सरस्वती से कहा कि इस संसार में सभी लोग मूक है, ये आपसी संवाद नहीं कर सकते हैं। ये सुनकर मां सरस्वती ने पूछा कि प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है? तब ब्रह्माजी ने मां सरस्वती से कहा कि वे अपनी वीणा से इन्हें ध्वनि प्रदान करें, जिससे इनके बीच संवाद हो सके और ये एक दूसरे की भावों को समझ सके। भगवान ब्रह्मा की आज्ञा का पालन करते हुए मां सरस्वती ने समस्त संसार को वाणी प्रदान की, जिसके बाद से मनुष्य‍य एक-दूसरे के विचारों को समझने लगे। मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन व्रत करने वाले भक्तों को ये कथा सुनने से मां सरस्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है और उन्‍हें जीवन में सफलता म‍िलती है।

Basant Panchami Vrat Importance (बसंत पंचमी व्रत का महत्व)

बसंत पंचमी को माता सरस्वती का जन्म दिवस माना जाता है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। पूजा के दौरान पीले फूल और पीले मिष्ठान का भोग मां को प्रसन्न करता है और इस व्रत से व्यक्ति को आत्मज्ञान और बोध की प्राप्ति होती है। मां सरस्वती के आशीर्वाद से व्यक्ति शिक्षा और कला के क्षेत्र में उन्नति हासिल करता है। इस दिन शिक्षण संस्थानों में संस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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