Basant Panchami 2023 Upay: मां सरस्वती को कला, साहित्य और संगीत की देवी के रूप में जाना जाता है। बुद्धि के साथ वह संगीत और कला की देवी है। उनके हाथ में रखी हुई वीणा इसी बात का प्रतीक का। यही कारण है कि संगीत की शुरुआत करने से पहले सभी संगीतकार मां सरस्वती का ध्यान लगाते हैं। बसंत पंचमी के दिन संगीतकार और कला प्रेमी लोगों को सरस्वती मां की पूजा अर्चना करनी चाहिए। मां सरस्वती की कृपा से आपके ज्ञान में वृद्धि होती है और कला में निपुणता आती है।
प्राचीन कथा अनुसार सरस्वती मां का जन्म बसंत पंचमी के दिन ब्रह्मा जी के मुख से हुआ था। जब सरस्वती मां का जन्म हुआ तब उनके हाथ में वीणा और पुस्तक थी। मान्यता है कि जब सरस्वती मां ने अपनी वीणा से मधुर नाद किया था तब समस्त संसार को वाणी प्राप्त हुई थी। इसलिए सरस्वती मां को स्वर की देवी कहा जाता है। सभी संगीतकार सरस्वती मां की इसी रूप में पूजा करते हैं। इस बसंत पंचमी आप भी अपने संगीत को ऊंची उड़ान देने के लिए सरस्वती मां की पूजा कर सकते हैं। यह उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकते हैं।
संगीत को देना चाहते हैं ऊंची उड़ान
अगर आप अपने संगीत को ऊंची उड़ान देना चाहते हैं और अपनी कला में निपुण होना चाहते हैं , तो बसंत पंचमी के दिन सरस्वती मां की पूजा करें और उन्हें पीले रंग की मिठाई का भोग लगाए।पीला रंग सरस्वती मां को बहुत पसंद होता है । इसके बाद मां सरस्वती के मंत्र ॐ ऐं हीं श्रीं क्लीं सस्वतैय नमः का 11 बार जाप करें ।
संगीत में उत्कृष्टता
बसंत पंचमी के दिन केसर की खीर बनाए और युवा कन्याओं को खिलाए। मां सरस्वती को इसका भोग लगाकर अपनी मनोकामना मांगे । मां सरस्वती की कृपा से आपको अपनी कला में जरूर उत्कृष्टता मिलेगी और आपको संगीत के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल होगी।
कंठ में मिठास लाने के लिए
वसंत पंचमी के दिन पूजा करते समय मां सरस्वती के मंत्र 'ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं' से ध्यान करें और उन्हें शहद का भोग लगाएं और फिर पीले रंग से बनी मिठाई प्रसाद के रूप में चढ़ाएं और पूजा के बाद इसका सेवन करें। संगीत के क्षेत्र में आपको विशेष सफलता मिलेगी और आपके कंठ में मिठास आकर सरस्वती का वास होगा ।
इस मंत्र से करें पूजा
अगर आप अपनी बुद्धि में वृद्धि चाहते हैं और कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहते है तो बसंत पंचमी के दिन शुभ मुहूर्त में मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महा सरस्वत्यै नमः' का जाप कर मां काली या सरस्वती के मंदिर जाएं और प्रसाद के रूप में पेठा या कोई भी फल चढ़ाएं।
