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Banke Bihari Prakatya Utsav 2025 (बांके बिहारी प्राकट्य उत्सव): जन्माष्टमी नहीं तो भी आज क्यों मनाया जा रहा है वृंदावन में बांके बिहारी प्राकट्योत्सव, क्या है वजह

Banke Bihari Prakatya Utsav 2025 Katha in Hindi (बांके बिहारी प्राकट्य उत्सव क्यों मनाया जाता है), बांके बिहारी जी के प्राकट्य की पौराणिक कथा, वृंदावन बांके बिहारी मंदिर उत्सव, Nidhivan & Seva traditions: ब्रजवासियों के आराध्य ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज का 482वां प्राकट्योत्सव (बिहार पंचमी) आज है। वृंदावन में स्थित बांके बिहारी जी का मंदिर भक्तों के लिए बहुत ही खास और पवित्र स्थान है। जानें आज यह क्यों मनाया जा रहा है।

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बांके बिहारी प्राकट्य उत्सव

Banke Bihari Prakatya Utsav 2025 (बांके बिहारी प्राकट्य उत्सव कथा): भक्तों के लिए पवित्र स्थल वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर अपनी खास मान्यता और लोकप्रियता के लिए जाना जाता है। ब्रजवासियों के प्रिय ठाकुर, श्री बांके बिहारी जी महाराज का 482वां प्राकट्योत्सव आज यानी 25 नवंबर को मनाया जा रहा है। जन्मोत्सव के इस खास मौके पर वृंदावन के निधिवन राज मंदिर और बांके बिहारी मंदिर में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करने और बधाई गीत गाने के लिए ब्रजधाम पहुंचे हैं।

आज क्यों मनाया जा रहा है बांके बिहारी प्राकट्य उत्सव

श्री बांके बिहारी जी महाराज का 482वां प्राकट्योत्सव मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जा रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तारीख आज यानी 25 नवंबर को मंगलवार के दिन की है। माना जाता है कि संगीत संत स्वामी हरिदास की भक्ति और संगीत साधना से वृंदावन के निधिवन में भगवान श्री बांके बिहारी प्रकट हुए थे। तभी से इस तिथि को यह उत्सव मनाया जाता है।

कैसे मनाया जा रहा है बांके बिहारी का प्राकट्य उत्सव

वृंदावन में करीब 5 लाख भक्त पहुंचने का अनुमान है। बांके बिहारी की प्रकट्य स्थली, निधिवन में सुबह 4 बजे पंचामृत से अभिषेक का शुभ कार्य किया गया। मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक स्थल पर ठाकुर जी का महाभिषेक पंचामृत से किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और बूरा का उपयोग हुआ। यह अभिषेक बहुत ही मंगलकारी और कल्याणकारी माना जाता है।

लाखों भक्त अपने आराध्य बांके बिहारी जी के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचे हैं। आज सुबह 9 बजे, स्वामी हरिदास जी की परंपरा के अनुसार, एक भव्य शोभायात्रा निधिवन मंदिर से शुरू होकर बांके बिहारी मंदिर तक जाएगी। इस जन्मोत्सव के मौके पर निधिवन राज मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिर परिसर को दीप, झालरों और फूलों से सुंदर रूप से सजाया गया है वहीं बाहर से खास फूल मंगवाए गए हैं।

बांके बिहारी का अर्थ क्या है

'बांके बिहारी' नाम का मतलब भी खास है। 'बांके' यानी तीनों दिशाओं में झुके हुए और 'बिहारी' यानी वृंदावन में रहने वाले। श्रीकृष्ण की यह मुद्रा उनके प्रेम और लीलाओं की याद दिलाती है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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