Bada Mangal History: बड़ा मंगल भगवान हनुमान (Hanuman ji) को समर्पित है। कहते हैं जो व्यक्ति ज्येष्ठ महीने में आने वाले बड़े मंगल पर बजरंगबली की सच्चे दिल से अराधना करता है उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार ज्येष्ठ महीने के मंगलवार के दिन ही पहली बार हनुमान जी (Lord Hanuman) की प्रभु श्री राम से मुलाकात हुई थी। इसलिए ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगल के नाम से जाना जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व होता है। जानिए बड़ा मंगलवार मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई।
लखनऊ से जुड़ी है बड़ा मंगल की कहानी (Bada Mangal Lucknow)
जब भी बड़ा मंगल की बात आती है तो लखनऊ का जिक्र जरूर होता है। दरअसल बड़ा मंगल की लखनऊ शहर से जुड़ी एक कहानी काफी प्रचलित है। इस कहानी के अनुसार लखनऊ में एक व्यापारी रहता था जिसने हनुमान जी से मन्नत मांगी थी कि अगर उसका केसर और इत्र का बिजनेस चल गया तो वो यहां बजरंगबली का भव्य मंदिर बनवाएगा। कुछ दिनों बाद इस व्यापारी से नवाब वाजिद अली शाह मिले जिन्होंने उस व्यापारी का सारा इत्र और केसर खरीद लिया। व्यापारी की मन्नत इस तरह से पूरी हो गई और उसने मन्नत के अनुसार हनुमान जी का भव्य मंदिर बनवाया। कहते हैं तभी से ही लखनऊ में ज्येष्ठ के महीने में बड़े मंगल को मनाने की परंपरा शुरू हो गई।
बड़ा मंगल से जुड़ी एक दूसरी कहानी भी काफी प्रचलित है। इस कहानी के अनुसार लखनऊ के अलीगंज में स्थित पुराने हनुमान मंदिर का निर्माण बेगम आलिया ने करवाया था। कहते हैं उन्हें सपने में एक बार हनुमान जी दिखाई दिए थे। कहते हैं मंदिर बनवाने के 2 साल बाद अचानक से महामारी फैल गई थी। तब बेगम ने भगवान हनुमान की विधि विधान पूजा करवायी थी। कहते हैं जिस दिन ये पूजा कराई थी उस दिन भी ज्येष्ठ महीने का मंगलवार था। हनुमान जी की कृपा से महामारी दूर हो गई। कहते हैं तभी से यहां ज्येष्ठ महीने के मंगलवार के दिन बड़ा मंगल मनाया जाता है।
बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल क्यों कहते हैं? (Why is Bada Mangal Called Budhwa Mangal?)
भारत में कई जगहों पर बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार एक बार वन में घूमते हनुमान जी का प्रभु श्री राम जी से मिलन एक पुरोहित के रूप में हुआ था। जिस दिन ये मिलन हुआ उस दिन ज्येष्ठ महीने का ही मंगलवार था। एक अन्य कथा के अनुसार महाभारत के समय में भीम को अपने बल पर काफी घमंड हो गया था। इस घमंड को तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक बूढ़े वानर का रूप लिया और भीम का घमंड तोड़ दिया। जिस दिन हनुमान जी ने भीम का घमंड तोड़ा था उस दिन भी ज्येष्ठ महीने का मंगलवार था। यही वजह है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है।
