अयोध्या श्रीराम मंदिर की ये 9 विशेषताएं क्या जानते हैं आप, जानिए क्यों हैं ये मंदिर इतना खास?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 22, 2026, 12:00 PM IST
Ayodhya Ram Mandir ki Visheshataein: अयोध्या में प्रभु रामलला का मंदिर बन चुका है। सैकड़ों साल के संघर्ष के बाद रामलला का मंदिर उनकी जन्मभूमि पर स्थापित हो गया। आज यह मंदिर बेहद ऐतिहासिक और अतुलनीय धरोहर बन चुका है। इस मंदिर में अब तक करोड़ों भक्तों ने दर्शन किया है और आपने भी इस मंदिर के बारे में बहुत कुछ सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर में ऐसी कई विशेषताएं हैं, जो इसे अद्भुत बनाती हैं। आइए जानते हैं कि वे क्या हैं?
श्रीराम मंदिर की क्या है खासियत
Ayodhya Ram Mandir ki Visheshataein: बीती 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में श्रीराम के बाल स्वरूप की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हुआ था। इस दिन विक्रम संवत 20280 था और पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि थी। इस दौरान गर्भगृह में पहले प्रभु श्रीराम के बाल रूप की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित हुई।
इसकी पहली वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाई गई थी। इसके बाद इस मंदिर में परिसर में स्थित अन्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठाएं हुईं, फिर ध्वजरोहण हुआ। अब प्रभु श्रीराम का मंदिर पूरी तरह से पूर्ण हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मंदिर में कई ऐसी विशेषताएं हैं, जिनके कारण ये मंदिर काफी अतुलनीय है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर की क्या विशेषताएं हैं?
परंपरागत नागर शैली में निर्मित मंदिर
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को उत्तर भारतीय नागर वास्तुकला शैली में बनाया गया है, जिसमें ऊपर की ओर शिखर (शिखराएं) और कलश होते हैं। जो प्राचीन भारतीय मंदिर कला की पहचान हैं।
मंदिर की विशाल विमाएं
मंदिर की लंबाई लगभग 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है। यह संरचना तीन मंजिला है, और प्रत्येक मंजिल लगभग 20 फीट ऊंची है, जिससे मंदिर का आयाम बेहद भव्य और प्रभावशाली दिखता है।
स्तंभ, द्वार और स्थापत्य सुंदरता
इस मंदिर में कुल 392 स्तंभ (पिलर) हैं और 44 द्वार (गेट) हैं, जिन पर देवताओं, देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं की सुंदर मूर्तिकला उत्कीर्ण है।
मुख्य गर्भगृह में श्री रामलला का बाल स्वरूप
मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री राम के बाल रूप (रामलला) की प्रतिमा स्थापित की गई है, जो बेहद अद्भुत है।
पांच मंडप और धार्मिक आयोजन स्थल
मंदिर परिसर में 5 भव्य मंडप हैं। जो नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप के नाम से जाने जाते हैं। यहां भक्ति, पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
सिंह द्वार से होता है प्रवेश
मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से सिंह द्वार के माध्यम से होता है। भक्तों को पूजा स्थल तक पहुंचने के लिए लगभग 32 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं, जिससे मंदिर की भव्यता का अनुभव बढ़ता है।
परिसर में हैं कई मंदिर और एक पवित्र कुआं
मंदिर परिसर में चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर बने हैं। इसमें सूर्य देव, देवी भगवती, गणेश भगवान और भगवान शिव के मंदिर हैं। इसके अलावा उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा और दक्षिणी भुजा में हनुमान जी के मंदिर भी हैं। मंदिर के पास पुरातन काल का सीता कूप भी मौजूद है।
70 एकड़ भूमि में फैला है परिसर
राम मंदिर परिसर लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसका लगभग 70% हिस्सा हरियाली के लिए सुरक्षित रखा गया है। मंदिर का निर्माण पर्यावरण-रक्षात्मक दृष्टिकोण से किया गया है।
मंदिर में नहीं है लोहे और स्टील का यूज
मंदिर निर्माण में कहीं भी लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है; यह पूरी तरह पारंपरिक और स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। नींव में 14 मीटर मोटी RCC बेस है जो एक कृत्रिम चट्टान जैसा मजबूत आधार प्रदान करती है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्थापत्य कला और आस्था का प्रतीक भी है। इसकी विशाल संरचना, पारंपरिक निर्माण तकनीक, मूर्तिकला और पवित्र गर्भगृह इसे विश्वभर के भक्तों के लिए एक दिव्य केंद्र बनाते हैं।