Reason Behind Wish In Nandi Ears: प्रत्येक पशु-पक्षी देवी देवताओं का वाहन होते हैं। जैसे मां दुर्गा के सिंह, भगवान विष्णु के गरुड़, भगवान इंद्र के एरावत हाथी वैसे ही भगवान शिव के नंदी वाहन है। हिंदू देवी देवताओं की तरह ही सनातन परंपरा में प्रत्येक देवी देवता के पशु पक्षी वाले वाहनों का भी अपना ही धार्मिक महत्व है। अक्सर मंदिरों में देखा जाता है कि भगवान शिव मंदिर के अंदर भोलेनाथ के दर्शन से पहले बाहर नंदी बैल की प्रतिमा लगी होती है। भक्त पहले नंदी बैल के दर्शन करते हैं फिर भोलेनाथ के दर्शन किए जाते हैं। भगवान शिव का वाहन नंदी मेहनत का प्रतीक है। मंदिर में नंदी की मूर्ति भगवान शिव की तरफ मुंह करके ही रखी जाती है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि भगवान शिव को नंदी बहुत प्रिय हैं। हिंदू धर्म में यह भी मान्यता है कि नंदी के कान में मनोकामना कहने पर वह मनोकामना पूरी होती है। जानिए क्यों नंदी के कानों में कहीं जाती है मनोकामना और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।
इसलिए कही जाती है नंदी के कानों में मन्नत
जब भी महादेव के मंदिर में जाते हैं, तो हमारी नजर शिवलिंग से पहले नंदी पर पड़ती है। भक्त भोलेनाथ से पहले नंदी के दर्शन करते हैं। भक्त नंदी के कानों में अपनी मन्नत बोलते हैं। नंदी के कानों में अपनी इच्छा कहने की परंपरा काफी पुरानी है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अक्सर तपस्या में लीन रहते हैं। ऐसे में नंदी भक्तों की मनोकामनाएं सुनते हैं और शिव जी तपस्या पूरी होने पर भक्तों की मनोकामनाएं उन्हें बताते हैं। इसके बाद भगवान अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करते हैं।
मन्नत मांगने से पहले इस बात का रखें ध्यन
जब नंदी के कान में कुछ कहते हैं, तो यह ध्यान जरूर ध्यान रखें कि कोई भी आपकी बात नहीं सुने पाए। अपने हाथों को अपनी आंखों से ढंकें और उन्हें इच्छाशक्ति बताएं। याद रहें नंदी के कान में कुछ कहें इससे पहले आपको नंदी की पूजा करनी होगी। इसके बाद नंदी के दाहिने कान में विश्वास के साथ अपनी इच्छा कहें। भगवान शिव आपकी इच्छा जरूर पूरी करेंगे।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

