Vastu For Shoes And Slippers: भाग्य पर पड़ता है जूते-चप्पलों का प्रभाव, इन दिनों में भूलकर भी न लाएं घर

Shoes And Slippers Vastu: वास्तु शास्त्र में जूते चप्पलों का भी विशेष महत्व बताया गया है। यदि इन पर ध्यान ना दिया जाए तो घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है साथ ही परिवार में सुख शांति का भी अभाव होता है।

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Vastu Tips For Foot Wear  |  तस्वीर साभार: Instagram
मुख्य बातें
  • वास्तु के अनुसार खरीदारी से भी व्यक्ति का गुड लक और बैड लक जुड़ा होता है
  • वास्तु में जूते चप्पल खरीदने का भी विशेष दिन निर्धारित किया गया है
  • वास्तु के अनुसार अमावस्या, मंगलवार, शनिवार या ग्रहण के दिन जूते चप्पल खरीदने से बचना चाहिए

Right Day to Buy Footwear: जूते चप्पल की जरूरत हर किसी को होती है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार जूते चप्पल खरीदते हैं, लेकिन कई बार हमारे बड़े बुजुर्ग हमें कुछ सामान खरीदने के लिए सही दिन चुनने की सलाह देते हैं। वास्तु के अनुसार खरीदारी से भी व्यक्ति का गुड लक और बैड लक जुड़ा होता है। कई बार कुछ खरीदते समय हम इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं कि कौन सा समान कौन से दिन खरीद रहे हैं। वास्तु में जूते चप्पल खरीदने का भी विशेष दिन निर्धारित किया गया है। वास्तु के अनुसार अमावस्या, मंगलवार, शनिवार या ग्रहण के दिन जूते चप्पल खरीदने से बचना चाहिए। इस दिन जूते चप्पल खरीदने से घर में दुर्भाग्य आता है इसलिए घर के बड़े बुजुर्ग भी इन दिनों में जूते चप्पल खरीदने के लिए मना करते हैं। आइए जानते हैं जूते- चप्पल को लेकर क्या कहता है वास्तु...

इसलिए नहीं खरीदते शनिवार को चप्पल

ज्योतिष के अनुसार शनिवार को जूते चप्पल भूल कर भी नहीं खरीदने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शनि का संबंध पैरों से होता है। शनिवार के दिन में जूते चप्पल खरीदने से शनि दोष चढ़ता है और घर में दुख दरिद्र आता है। इस दिन चप्पल या जूते खरीदने से शनि देव नाराज हो जाते हैं।

बेड के नीचे न रखें जूते चप्पल

जूते चप्पल को लेकर वास्तु में कई बातें बताई गई हैं। वास्तु के अनुसार जिस बेड पर सोया जाए उस बेड के नीचे कभी भी जूते चप्पल नहीं रखनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य में प्रभाव पड़ता है और पति पत्नी के संबंध भी खराब होते हैं।

फटे हुए जूते इस दिन करें घर से बाहर

अगर बार-बार जूते-चप्पल टूट रहे हैं या फट रहे हैं तो पहने हुए चूते-चप्पल शनिवार के दिन किसी भी शनि मंदिर के बाहर छोड़ कर आ जाना चाहिए। ऐसा करने से शनि का कुप्रभाव दूर हो जाता है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।) 

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