Astro gemstone Remedy: पति-पत्नी के बीच प्यार और अच्छे संबंध से ही वैवाहिक जीवन की गाड़ी पटरी पर चलती है। लेकिन कभी-कभी दोनों के बीच छोटी सी बात पर भी अनबन हो जाती है। रोज झगड़े शुरू हो जाते हैं। बाद में यही झगड़ा बड़े विवाद का रूप ले लेती है और दांपत्य जीवन में कड़वाहट आ जाती है। रिश्ते में भारी खटास आ जाता है लेकिन हम कारण का पता नहीं लगा पाते कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार ये सब व्यक्ति के ग्रहों की दशा के असर के कारण होता है। इसके लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं जिससे पति-पत्नी के बीच क्लेश दूर होता है और रिश्ते में मिठास आती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध खराब होने लगते हैं तो ग्रह के अनुसार रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। इन रत्नों को धारण करने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है। ज्योतिष में पति-पत्नी के बीच बिगड़ते रिश्ते को सुधारने के लिए व्यक्ति को ओपल रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इस रत्न को सही तरीके से धारण किया जाए, जिससे कि इसका पूरा लाभ मिल सके। इसके अलावा और भी उपाय भी बताए गए हैं, जिससे पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है।
इन उपायों से भी रिश्ते में बढ़ेगा प्यार
- गुरूवार के दिन केले के पेड़ की जड़ पर पति-पत्नी साथ में जल चढ़ाकर हल्दी से तिलक करें और पीला वस्त्र अर्पित करें। इससे पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है।
- पति-पत्नी के बीच अगर लगातार झगड़े होते हैं तो इसके उपाय के लिए पत्नी सिरहाने कपूर रखकर सो जाए और अगले दिन उसे जला दे। इससे कुछ ही दिन में झगड़े होने बंद हो जाएंगे।
- पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार बढ़ाने के लिए 7 साबूत हल्दी की गांठें लेकर उसे पीले धागे से बांध लें। फिर ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और इसे विष्णु जी को चढ़ाएं। इससे दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है।
- पति-पत्नी के बीच प्यार होना बेहद जरूरी है। क्योंकि इन्हीं छोटी-छोटी अनबन के कारण स्थिति बिगड़ सकती है और फिर तलाक जैसी स्थिति भी आ सकती है। इसलिए समय रहते ही रत्न, उपाय और आपसी समझदारी से रिश्ते में प्रेम बढ़ाया जा सकता है।
कैसे और कब धारण करें ओपल रत्न
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि, ओपल रत्न किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए। इसे शुक्रवार के दिन अनामिका अंगुली में पहनना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि इसे धारण करने से पहले रत्न को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें, फिर इसके बाद रत्न को एक सफेद रंग के कपड़े में रखकर 'ओम द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:' मंत्र का जाप करें।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

