Ashadha Vinayak Chaturthi 2022: कब है आषाढ़ विनायक चतुर्थी, गणेशजी की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़े ये व्रत कथा

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 30, 2022, 12:40 AM IST

Ashadha Vinayak Chaturthi Katha: हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस बार आषाढ़ विनायक चतुर्थी 3 जुलाई को पड़ रही है।

Ashadha Vinayak Chaturthi 2022: कब है आषाढ़ विनायक चतुर्थी, गणेशजी की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़े ये व्रत कथा

Ashadha Vinayak Chaturthi Vrat Katha Puja: हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ माह को साल का चौथा माह कहा जाता है। इस माह कई व्रत-त्योहार पड़ते हैं। हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। विनयाक चतुर्थी पर विग्घहर्ता भगवान गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने का विधान है।

शास्त्रों में आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी के महत्व के बारे में बताया गया है। इस माह में पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। लेकिन पूजा के दौरान व्रत कथा जरूर पढ़े तभी पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। इसलिए पूजा के समय विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। जानते हैं विनायक चतुर्थी की व्रत कथा के बारे में..

विनायक चतुर्थी तिथि व मुहूर्त

  • चतुर्थी तिथि प्रांरभ- शनिवार 2 जुलाई 2022 दोपहर 03:16 मिनट से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त- रविवार, 3 जुलाई शाम 05:06 तक
  • व्रत व पूजन का शुभ मुहूर्त- 3 जुलाई सुबह 11:02 से 01:49 तक

विनायक चतुर्थी व्रत कथा

वैसे तो भगवान गणेश की चतुर्थी से जुड़ी चार कथाएं है। लेकिन विनायक चतुर्थी से जुड़ी सबसे प्रचलित और पौराणिक कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के तट पर माता पार्वती और भगवान शिव बैठे थे। समय व्यतीत करने के लिए माता पार्वती ने भगवान शिव से चौपड़ खेल का आनंद लेने की बात कही। लेकिन समस्या यह थी कि खेल में हार-जीत का फैसला कौन करेगा। निर्णायक की भूमिका के शिवजी एक मिट्टी पुतला बनाकर उसमें प्राण डाल दिए। शिवजी ने उसे आदेश दिया कि, हम चौपाल खेल रहे हैं तुम विजेता का फैसला करना और इसके बाद शिव-पार्वती खेल का आनंद लेने लगे। शिव-पार्वती के बीच तीन बार चौपाल का खेल हुआ, जिसमें मां पार्वती की जीत हुई। जब बालक को विजेता घोषित करने की आज्ञा दी गई तो उसने शिवजी विजेता बताया। माता पार्वती बालक के फैसले पर रुष्ट व क्रोधित हो गईं और उन्होंने बालक को श्राप दे दिया।

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बालक को अपनी गलती का आभास हुआ और उसने माता पार्वती से क्षमा मांगी। तब माता पार्वती ने कहा कि श्राप वापस नहीं होगा। लेकिन माता ने बालक को श्राप मुक्ति के उपाय बताए। माता ने बालक से कहा कि, श्रीगणेश की पूजा के लिए यहां नागकन्याएं आएंगी। तुम उनके कहे अनुसार व्रत करना, जिससे तुम श्राप मुक्त हो जाओगे।

एक वर्ष बाद वहां नागकन्याएं आईं। बालक ने नागकन्याओं से व्रत विधि के बारे पूछा और 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत व पूजन किया। भगवान गणेश बालक की निष्ठा और श्रद्धा से प्रसन्न हुए और वर मांगने को कहा। तब बालन ने कहा-‘हे विनायक! मुझे माता पार्वती के श्राप से मुक्त कर दीजिए। भगवान गणेश के आशीर्वाद से बालक श्राप मुक्त हो गया।

(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

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