अध्यात्म

क्या आंवला नवमी पर आंवला खा सकते हैं? आंवला नवमी पर चावल खाना चाहिए या नहीं? जानें, अक्षय नवमी पर क्या करें, क्या न करें

Akshay Navami Par Kya Karen Kya Na Karen: दिवाली के 10 दिन बाद अक्षय नवमी मनाई जाती है। आज 31 अक्टूबर को वही खास दिन है। यहां से आप जान सकते हैं कि अक्षय नवमी को आंवला खा सकते हैं या नहीं। साथ ही यहां से जानें कि आंवला नवमी पर चावल खाना चाहिए या नहीं।

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अक्षय नवमी पर क्या करें, क्या न करें (pic credit: canva)

Akshay Navami Par Kya Karen Kya Na Karen: आजअक्षय नवमी है। इसे आंवला नवमी भी कहते हैं। तो आज आंवला नवमी पर क्या आंवला खा सकते हैं? आंवला नवमी पर चावल खाना चाहिए या नहीं? ऐसे सभी सवालों के जवाब यहां मौजूद हैं। अक्षय नवमी पर क्या करें, क्या न करें इसकी पूरी लिस्ट आप यहां से देख सकते हैं। यहां आंवला नवमी से जुड़े कई तरह के सवालों के जवाब मौजूद हैं।

आंवला नवमी पर क्या करना चाहिए-

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • आंवले के पेड़ की पूजा करें
  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
  • आंवले का सेवन करें
  • आंवले के पेड़ के नीचे खाना पकाकर खाएं
  • दान-पुण्य करें

आंवला नवमी पर क्या नहीं करना चाहिए-

  • आंवले के पेड़ को नुकसान न पहुचाएं
  • प्याज, लहसुन और मांस न खाएं
  • झूठ, कलह और गुस्सा न करें
  • आंवला तोड़ने के बाद पूजा न करें
  • काले रंग के कपड़े न पहनें
  • अगर आप व्रत में हैं तो चावल न खाएं
  • दान करने में कंजूसी न करें

क्या आंवला नवमी पर आंवला खा सकते हैं?

हां, आंवला नवमी के दिन आंवला खाना शुभ माना जाता है। अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ की पूजा के बाद आंवले का प्रसाद खाया जाता है।

आंवला नवमी पर चावल खाना चाहिए या नहीं?

आंवला नवमी पर चावल खा सकते हैं। अगर आप उपवास में हैं तो आपको चावल नहीं खाना चाहिए। लेकिन अगर केवल पूजा करते हैं और व्रत में नहीं है तो आप चावल खा सकते हैं। वहीं, अगर आंवला नवमी पर एकादशी भी है तो चावल नहीं खा सकते हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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