Amalaki Ekadashi Vrat Paran Time And Vidhi Today (आमलकी एकादशी व्रत का पारण टाइम और विधि क्या है): 28 फरवरी 2026, शनिवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। द्वादशी तिथि रात 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को रखा गया था, इसलिए आज आमलकी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा।
एकादशी व्रत जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, उतना ही आवश्यक उसका विधि-विधान से पारण करना भी होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि सही समय पर व्रत खोलना ही पूर्ण फल देने वाला होता है। यदि पारण उचित समय में न किया जाए तो व्रत का पुण्य अधूरा माना जाता है।
आमलकी एकादशी पारण समय क्या है? (Amalaki Ekadashi ka Paran Time Kya Hai)
पारण हमेशा द्वादशी तिथि में किया जाता है। ध्यान रहे कि पारण हरि वासर द्वादशी के प्रारंभिक एक भाग के बाद ही करना चाहिए। इसलिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद, जब हरि वासर समाप्त हो जाए, उसी समय से लेकर द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले तक पारण करना शुभ रहता है। 28 फरवरी को द्वादशी रात 8 बजकर 43 मिनट तक है, इसलिए पारण दिन में ही करना उचित रहेगा। इस दिन सुबह 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक पारण कर लें।
आमलकी एकादशी व्रत पारण की विधि (Amalaki Ekadashi Vrat Paran Vidhi)
पारण करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु या श्रीहरि का पूजन करें। यदि संभव हो तो आंवले (आमलकी) के वृक्ष या फल का पूजन भी करें, क्योंकि यह व्रत विशेष रूप से आंवले से जुड़ा है।
पारण से पहले दान करना शुभ माना गया है। ब्राह्मणों या जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देना पुण्यकारी होता है। इसके बाद भगवान को अर्पित भोग या आंवले का फल ग्रहण कर व्रत खोलें। आमलकी एकादशी में आंवले का विशेष महत्व है, इसलिए पारण में आंवले का सेवन शुभ फलदायी माना गया है।
व्रत खोलने के बाद भी इस दिन सात्विक और शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। लहसुन, प्याज और तामसिक आहार से परहेज करें। पारण करते समय यह संकल्प लें कि व्रत में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हैं और ईश्वर से कृपा की कामना करें। यदि निर्जला व्रत रखा था तो पहले जल या नींबू-शहद मिश्रित जल लें, उसके बाद हल्का भोजन करें। एकदम भारी या तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
पारण का धार्मिक महत्व
आमलकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका संबंध आंवले के पूजन से है। मान्यता है कि विधिपूर्वक व्रत और पारण करने से पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पारण को व्रत का समापन नहीं, बल्कि उसका पूर्ण फल प्राप्त करने का चरण माना जाता है। इस प्रकार 28 फरवरी 2026 को द्वादशी तिथि के भीतर विधि-विधान से पारण करना ही व्रत की सफलता और शुभ फल की कुंजी है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
