Akshaya Tritiya (Akha Teej) 2025 Katha In Hindi (अक्षय तृतीया व्रत कथा): अक्षय तृतीया की पौराणिक कथा अनुसार प्राचीन काल में एक छोटे से गांव में धर्मदास नाम का एक गरीब वैश्य रहता था। जो हमेशा अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए चिंतित रहता था। वो बहुत धार्मिक पृव्रत्ति का था। पूजा-पाठ में उसका बहुत मन लगता था। एक दिन उसने मार्ग पर जाते समय कुछ ऋषियों के मुख से अक्षय तृतीया व्रत के महात्म्य के बारे में सुना। तब उसने भी इस दिन व्रत रखकर दान-पुण्य के कार्य करने का विचार किया।
जब अक्षय तृतीया आई तो उसने उस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करने के बाद विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की और व्रत रखा। साथ ही अपने सामर्थ्यानुसार जल से भरे घड़े, पंखे, चावल, नमक, जौ, सत्तू, गेंहू, गुड़, घी, दही, सोना तथा वस्त्र आदि चीजों का दान किया। इसके बाद उसके जीवन में जब भी अक्षय तृतीया का पावन पर्व आया तब-तब उसने पूरी श्रद्धा से व्रत रख दान-पुण्य के कार्य किए।
कहते हैं अक्षय तृतीया व्रत को रखने और इस दिन दान-पुण्य करने से ही यही वैश्य दूसरे अगले जन्म में कुशावती का राजा बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर ब्राह्मण का वेष धारण करके आते थे और उसके महायज्ञ में शामिल होते थे।
लेकिन इतना संपन्न होने के बाद भी उसे कभी भी अपनी श्रद्धा और भक्ति का घमंड नहीं हुआ और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलता रहा। माना जाता है कि यही राजा आगे के जन्मों में भारत के प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ। कहते हैं अक्षय तृतीया के दिन जो भी इस कथा का महत्त्व सुनता है और विधि विधान से पूजा और दान आदि कार्य करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही उसके जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है।
