अध्यात्म

अक्षय तृतीया पर क्या करना चाहिए, क्या बाल धो सकते हैं, क्या प्याज खा सकते हैं, क्या सोना दान करना होता है

Akshaya Triritya par kya karna chahiye: अक्षय तृतीया की शुभ तिथि के कुछ नियम भी हैं। जानें अक्षय तृतीया पर क्या करें और क्या नहीं। क्या बाल धो सकते हैं, सोना दान करें या नहीं।

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अक्षय तृतीया पर क्या करना चाहिए

Akshaya Triritya par kya karna chahiye: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, जप और पूजा का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए इसे 'अक्षय' यानी कभी न खत्म होने वाला कहा जाता है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर आने वाला यह पर्व सुख-समृद्धि, धन वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन लोग बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य शुरू कर देते हैं।

लेकिन हर साल लोगों के मन में कुछ सामान्य सवाल जरूर आते हैं (vrat niyam) - क्या बाल धो सकते हैं? क्या प्याज खाना ठीक है? क्या सोना दान करना जरूरी होता है? आइए सरल भाषा में इन परंपराओं को समझते हैं।

अक्षय तृतीया पर क्या करना चाहिए

अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं और पीले या सफेद फूल अर्पित करें। इस दिन जौ, चावल, सत्तू, खीरा, जल से भरा कलश और मिठाई का दान शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया जप, तप, हवन, दान और सेवा कई गुना फल देता है। इसलिए जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या जलदान करना विशेष पुण्यकारी माना गया है। नए काम की शुरुआत, घर खरीदना, निवेश या व्यवसाय शुरू करने के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या अक्षय तृतीया पर बाल धो सकते हैं

अक्सर लोग सोचते हैं कि त्योहार के दिन बाल धोना वर्जित होता है, लेकिन अक्षय तृतीया के संदर्भ में ऐसा कोई धार्मिक निषेध नहीं है। उल्टा, इस दिन स्नान और शुद्धता को बहुत महत्व दिया गया है।

यदि आप पूजा करने जा रहे हैं, तो साफ-सुथरे और स्वच्छ रहना शुभ माना जाता है। इसलिए बाल धोना पूरी तरह से स्वीकार्य है। कई परंपराओं में तो महिलाएं विशेष रूप से स्नान कर नए या साफ वस्त्र पहनकर पूजा करती हैं।

क्या इस दिन प्याज या लहसुन खा सकते हैं

अक्षय तृतीया को सात्विकता का पर्व माना जाता है। इसलिए अधिकांश घरों में इस दिन सात्विक भोजन बनाने की परंपरा होती है। धार्मिक दृष्टि से प्याज और लहसुन तामसिक आहार माने जाते हैं, इसलिए व्रत या पूजा करने वाले लोग इन्हें खाने से बचते हैं।

हालांकि यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का विषय है। जो लोग व्रत रखते हैं या पूजा करते हैं, वे फलाहार या बिना प्याज-लहसुन का भोजन करना पसंद करते हैं।

क्या अक्षय तृतीया पर सोना दान करना जरूरी है

अक्षय तृतीया और सोना खरीदने की परंपरा काफी लोकप्रिय है, लेकिन सोना दान करना अनिवार्य नहीं है। शास्त्रों में मुख्य महत्व 'दान भावना' का बताया गया है, न कि वस्तु की कीमत का।

यदि सामर्थ्य हो तो सोना या चांदी दान किया जा सकता है, लेकिन उतना ही पुण्य अन्न, जल, गुड़, सत्तू, वस्त्र या जरूरतमंदों की सहायता करने से भी मिलता है। असल में इस दिन दान का उद्देश्य अहंकार छोड़कर सेवा भावना अपनाना है।

अक्षय तृतीया का असली संदेश

अक्षय तृतीया केवल खरीदारी या शुभ मुहूर्त का पर्व नहीं, बल्कि सकारात्मक शुरुआत और सद्कर्म का दिन है। इस दिन मन, वचन और कर्म से अच्छे कार्य करने की परंपरा हमें जीवन में संतुलन और संतोष का संदेश देती है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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