Akshay Patra Kya Hai: अक्षय तृतीया (akshaya tritiya) का पर्व हिंदू धर्म में सुख, समृद्धि और अटूट सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने, दान करने और पूजा-पाठ करने की परंपरा तो प्रचलित है ही, लेकिन एक और विशेष धार्मिक मान्यता है - अक्षय पात्र की पूजा। माना जाता है कि जिस घर में अक्षय पात्र की स्थापना और पूजन किया जाता है, वहां कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। इसकी कहानी महाभारत (mahabharat) काल से भी जुड़ी है।
अक्षय पात्र की महाभारत में वर्णित कथा
अक्षय पात्र का उल्लेख महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव वनवास में थे, तब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी अतिथियों और ऋषि-मुनियों के भोजन की व्यवस्था करना। धर्मराज युधिष्ठिर अपनी इस चिंता को लेकर सूर्य देव की उपासना करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें एक दिव्य पात्र प्रदान किया, जिसे अक्षय पात्र कहा गया।
इस पात्र की विशेषता यह थी कि जब तक द्रौपदी स्वयं भोजन नहीं कर लेती थीं, तब तक उसमें से असीमित भोजन निकलता रहता था। कितने भी अतिथि आएं, सभी को तृप्ति तक भोजन कराया जा सकता था। द्रौपदी के भोजन करने के बाद ही उस दिन के लिए पात्र की शक्ति समाप्त होती थी। यही कारण है कि अक्षय पात्र को अन्नपूर्णा कृपा और ईश्वरीय संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
'अक्षय' शब्द का आध्यात्मिक अर्थ
'अक्षय' का अर्थ है - जिसका कभी क्षय न हो, जो हमेशा बना रहे। धार्मिक दृष्टि से अक्षय पात्र केवल एक चमत्कारी बर्तन नहीं, बल्कि जीवन में निरंतर मिलने वाली समृद्धि, अन्न, दान और संतोष का प्रतीक है।
अक्षय तृतीया के दिन इस पात्र की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता। यानी इस दिन की गई पूजा, दान और संकल्प जीवनभर फल देते हैं।
अक्षय तृतीया पर अक्षय पात्र कैसे बनाएं
धार्मिक परंपरा के अनुसार अक्षय पात्र घर में सरल तरीके से स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए किसी चांदी, पीतल, तांबे या मिट्टी के साफ बर्तन का उपयोग किया जाता है।
पूजा के लिए बर्तन में गेहूं, चावल, दाल या मिश्रित अन्न भरें। कुछ लोग इसमें सिक्के या हल्दी की गांठ भी रखते हैं, जो लक्ष्मी और अन्नपूर्णा का प्रतीक मानी जाती है। इसके बाद बर्तन पर स्वास्तिक बनाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अन्नपूर्णा देवी का ध्यान करते हुए पूजा की जाती है।
घर में अक्षय पात्र कहां रखें
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय पात्र को घर के रसोईघर या पूजा स्थान में रखना सबसे शुभ माना जाता है। इसे हमेशा साफ स्थान पर रखें और खाली न रहने दें। समय-समय पर उसमें रखा अन्न दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
अक्षय तृतीया पर पूजा का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया को सदैव शुभ मुहूर्त वाला दिन कहा जाता है, क्योंकि इस दिन किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में अक्षय पात्र की स्थापना और पूजा करना घर में स्थायी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद माना जाता है। दरअसल, अक्षय पात्र हमें यह संदेश देता है कि समृद्धि केवल संग्रह से नहीं, बल्कि दान, सेवा और संतोष से बढ़ती है। यही वजह है कि अक्षय तृतीया पर अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है।
