अध्यात्म

13 या 14 जून अधिक मास की शिवरात्रि कब है, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और शिवरात्रि पर जल कब चढ़ाएं

अधिक मास की शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह तीन साल में एक बार आती है। जानिए 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा, पूजा विधि और शिवरात्रि पर जल कब चढ़ाएं।

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अधिक मास की शिवरात्रि कब है

भगवान शिव के भक्तों के लिए शिवरात्रि का व्रत बेहद खास माना जाता है, लेकिन जब यह अधिक मास में पड़ती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसे में अधिक मास की शिवरात्रि का इंतजार श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ करते हैं।

मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने, व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। जानिए अधिक मास की शिवरात्रि कब है, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और शिवरात्रि पर जल कब चढ़ाएं

अधिक मास की शिवरात्रि 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार अधिक मास की मासिक शिवरात्रि 13 जून 2026 यानि कल शनिवार को मनाई जाएगी। यह दुर्लभ संयोग लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व सामान्य मासिक शिवरात्रि से अधिक माना जाता है।

अधिक मास शिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि तिथि का प्रारंभ: 13 जून को शाम 04:07 बजे होगा और 14 जून को दोपहर 12:19 बजे तक इसका समापन होगा।

निशिता काल (मध्यरात्रि पूजा मुहूर्त): रात्रि 11:01 बजे से 12:41 बजे तक।

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:02 बजे से 04:42 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक।

Adhik Maas Shivratri

Adhik Maas Shivratri

अधिक मास शिवरात्रि पूजा विधि

अधिक मास की शिवरात्रि पर विधि विधान के साथ पूजा करने का महत्व होता है। ऐसे में अगर आप इस अधिक मास की शिवरात्रि पर व्रत पूजा कर रहे हैं। तो सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, धतूरा, सफेद फूल और बेलपत्र अर्पित करें। भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें। इसी के साथ साथ शाम के समय प्रदोष काल में पुनः पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

शिवरात्रि पर जल कब चढ़ाएं?

शिवलिंग पर जलाभिषेक सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिनभर किया जा सकता है। हालांकि शिवरात्रि के दिन प्रदोष काल और रात्रि पूजा का समय विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से की गई शिव आराधना भगवान भोलेनाथ को शीघ्र प्रसन्न करती है। अधिक मास की यह शिवरात्रि भक्तों के लिए भक्ति, साधना और आत्मिक शांति प्राप्त करने का एक विशेष अवसर मानी जाती है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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