aaj suryast kab hoga 19 February 2026 (aaj roza kholne ka time kya hai), Roza Khole ki aaj ki dua: रमजान के मुकद्दस दिनों में हर रोजेदार के लिए सबसे अहम पल होता है इफ्तार का — यानी रोजा खोलने का वक्त। पूरे दिन सब्र और इबादत के बाद जब सूरज ढलता है, तो दिल में सुकून और शुक्र का एहसास खुद-ब-खुद उतर आता है। आज 19 फरवरी 2026, गुरुवार को रोजा खोलने का सही समय क्या है, और इफ्तार की दुआ क्या पढ़ी जाती है - आइए विस्तार से जानते हैं।
आज सूर्यास्त कब होगा 9 फरवरी 2026 को
आज 19 फरवरी 2026 को सूर्यास्त लगभग शाम 5:54 बजे (IST) के आसपास होगा। अलग-अलग शहरों में यह समय 2-5 मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इस्लामी परंपरा के अनुसार रोजा सूर्यास्त होते ही खोला जाता है। जैसे ही सूरज पूरी तरह क्षितिज से नीचे चला जाए और मग़रिब की अज़ान हो, उसी वक्त इफ्तार करना सुन्नत माना गया है। इसलिए रोजेदारों को सलाह दी जाती है कि अपने शहर के स्थानीय समय के अनुसार मग़रिब की अज़ान पर ध्यान दें।
आज 19 फरवरी 2026 को सूर्यास्त का समय
| शहर | सूर्यास्त का समय |
|---|---|
| नई दिल्ली | 6:13 PM |
| नोएडा | 6:13 PM |
| गाजियाबाद | 6:12 PM |
| फरीदाबाद | 6:13 PM |
| गुरुग्राम | 6:13 PM |
| मेरठ | 6:12 PM |
| हापुड़ | 6:11 PM |
| पानीपत | 6:12 PM |
| लखनऊ | 6:03 PM |
| आगरा | 6:10 PM |
| कानपुर | 6:01 PM |
| जयपुर | 6:14 PM |
| पटना | 5:54 PM |
| चंडीगढ़ | 6:14 PM |
| भोपाल | 6:19 PM |
| इंदौर | 6:20 PM |
| मुंबई | 6:41 PM |
| पुणे | 6:40 PM |
| अहमदाबाद | 6:34 PM |
| सूरत | 6:35 PM |
| वडोदरा | 6:34 PM |
| कोलकाता | 5:47 PM |
| चेन्नई | 6:25 PM |
| बेंगलुरु | 6:39 PM |
| हैदराबाद | 6:30 PM |
| रायपुर | 6:24 PM |
| भुवनेश्वर | 5:47 PM |
| गुवाहाटी | 5:35 PM |
| वाराणसी | 6:00 PM |
| प्रयागराज | 6:02 PM |
| कोच्चि (कोची) | 6:39 PM |
| तिरुवनंतपुरम | 6:39 PM |
| गोवा | 6:40 PM |
| उदयपुर | 6:15 PM |
आज 19 फरवरी 2026 को रोजा कितने बजे खोलें
अगर आप उत्तर भारत (जैसे दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, जयपुर आदि) में हैं, तो आज रोजा खोलने का समय लगभग शाम 5:54 बजे से 6:00 बजे के बीच रहेगा। अन्य शहरों का टेबल भी हमने यहां दिया है। जैसे ही अज़ान की आवाज़ सुनाई दे, खजूर या पानी से रोजा खोलना सबसे बेहतर तरीका माना गया है। हदीसों में आता है कि पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खजूर से इफ्तार फरमाते थे, और अगर खजूर न हो तो पानी से। ध्यान रखें कि इफ्तार में जल्दबाजी नहीं, बल्कि यक़ीन और शांति का भाव होना चाहिए। यह सिर्फ भूख मिटाने का समय नहीं, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करने का भी वक्त है।
रोजा खोलने की दुआ क्या है
रोजा खोलते समय जो दुआ पढ़ी जाती है, वह बेहद खूबसूरत और असरदार मानी जाती है जो कि इस तरह है
Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizq-ika-aftartu.
रोजा खोलने की दुआ का हिंदी अर्थ इस तरह है - ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे ही दिए हुए रिज़्क से इफ्तार किया।
इसके अलावा रोजा खोलने की एक और मशहूर दुआ है:
Zahabaz-zama’u wabtallatil-urooqu wa sabatal-ajru inshaAllah.
इसका अर्थ है : प्यास खत्म हो गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो सवाब निश्चित हो गया।
दुआ पढ़कर इफ्तार करना रोजे की रूह को मुकम्मल करता है। माना जाता है कि इफ्तार के समय की गई दुआ खास तौर पर कबूल होती है।
इफ्तार का आध्यात्मिक महत्व
रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, तक़वा और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का जरिया है। जब सूरज ढलता है और रोजेदार इफ्तार करता है। इफ्तार के वक्त गरीबों और जरूरतमंदों को याद करना, उनके साथ खाना साझा करना भी बेहद पुण्य का काम माना गया है। रहमत, बरकत और मोहब्बत से जुड़ी यही रमजान की असली खूबसूरती है।
