Aaj navratri ka kaun sa din hai (navratri 5th day which devi): नवरात्रि इस साल 10 दिनों की है और ऐसे में आज कौन सा दिन है, इस बात की कंफ्यूजन बनी हुई है। तो बता दें कि आज नवरात्रि का पांचवा दिन है और आज माता स्कंदमाता की पूजा जाएगी।माना जाता है कि स्कंदमाता की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करने से निसंतान व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। अब मां स्कंदमाता का मनमोहक स्वरूप कैसा नजर आता है, माता रानी को क्या भोग लगता है, मां स्कंदमाता की पूजा कैसे की जाती है.. ये सब आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही साथ यहां मां स्कंदमाता की कथा और आरती भी मौजूद है।
स्कंदमाता का स्वरूप
मां की गोद में स्कंद देव विराजमान हैं। मां खुद कमल के आसन पर विराजमान हैं। इस कारण मां स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। मां का वाहन सिंह है। मान्यता है कि मां भगवती के पंचम स्वरूप की उपासना करने से संतान से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं।
स्कंदमाता पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल या मंदिर में चौकी पर मां स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। मां को गंगाजल से स्नान कराएं, षोडशोपचार पूजन करें। मां स्कंदमाता को कमल का फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ॐ देवी स्कंदमातायै नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। मां स्कंदमाता की आरती करें और दुर्गासप्तशती या देवी कवच का पाठ करें।
स्कंदमाता का भोग
मां स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है। साथ ही केसरयुक्त खीर का भी भोग लगा सकते हैं। माता को पीले रंग की चीजें बेहद प्रिय हैं इसलिए पूजा में फल, वस्त्र आदि पीले रंग का प्रयोग करें।
स्कंदमाता मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।
सिंहासना-गता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्कंदमाता की कथा
तारकासुर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन कर दिया था। तब ब्रह्माजी प्रसन्न होकर उस राक्षस को साक्षात दर्शन दिए। ब्रह्माजी को देखकर तारकासुर ने भगवान से अमर रहने का वरदान मांगा। ब्रह्माजी ने उसके इस वर को सुनकर उनसे कहा हे पुत्र जो इस धरती पर जन्म लिया उसका मरना निश्चय है। तब तारकासुर ब्रह्माजी का यह वचन सुनकर निराश होकर फिर से ब्रह्मा जी से कहा कि हे प्रभु कुछ ऐसा करेगी कि मैं शिवजी के पुत्र के हाथों मरू। उसके मन में यह था कि भगवान शिव की विवाह तो होगी नहीं और उनका कोई पुत्र नहीं होगा। इस वजह से उसकी मृत्यु भी नहीं हो सकेगी। तब ब्रह्मा जी तथास्तु कह कर वहां से अंतर्ध्यान हो गए। फिर तो तारकासुर ने अपने अत्याचार से पूरे पृथ्वी और स्वर्ग को त्रस्त कर दिया। हर कोई उसके अत्याचारों से परेशान हो चुका था। तब भगवान परेशान होकर शिव जी के पास गए। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए शिवजी से तारकासुर से मुक्ति दिलाने को कहा। तब भगवान शिव ने पार्वती से विवाह किया और कार्तिक के पिता बनें। बाद में भगवान कार्तिकेय बड़े होकर तारकासुर का वध किये। आपको बता दें स्कंदमाता कार्तिकी ही माता है।
स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कही पहाडो पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥
