25 मार्च को सातवां नवरात्र है या आठवां (Navratri Day Today 25 March): चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करने का विधान है। माता के इन सभी रूपों का भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजन करते और व्रत रखते हैं। ऐसे में आज यानी 25 मार्च 2026 को लेकर लोगों के मन में यह सवाल है कि आज नवरात्रि का कौन सा दिन है सातवां या आठवां? आइए जानते हैं आज सातवां नवरात्र या है आठवां। नोट करें आज के नवरात्र का रंग, आज के नवरात्र की कथा, मंत्र और आरती।
आज सातवां नवरात्र है या आठवां?
पंचांग के अनुसार, आज यानी 25 मार्च के दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। सप्तमी तिथि दोपहर 01:50 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर आज 25 मार्च को नवरात्रि का सातवां दिन (सप्तमी) मनाया जाएगा। इसलिए आज का दिन सातवां नवरात्र है।
आज सातवें नवरात्र पर कौन सी माता की पूजा होगी
नवरात्रि की सप्तमी तिथि को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। छठे दिन जहां भक्त मां कात्यायनी की आराधना करते हैं, वहीं इसके अगले दिन यानी सातवें नवरात्र पर देवी के उग्र और शक्तिशाली रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। दोनों ही स्वरूप भक्तों को शक्ति, साहस और भय से मुक्ति का आशीर्वाद देते हैं। मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का सबसे उग्र और भयावह रूप माना जाता है, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे अत्यंत शुभ फल देने वाली होती हैं, इसलिए उन्हें 'शुभंकरी' नाम से भी जाना जाता है। उनका काला स्वरूप, खुले बाल, गले में माला और अग्नि के समान चमकती आंखें नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक हैं।
सातवें नवरात्र का शुभ रंग (25 मार्च 2026)
नवरात्रि के हर दिन का एक विशेष रंग होता है, जिसे धारण करना शुभ माना जाता है। सातवें नवरात्र पर नीला या काला रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग शक्ति, रहस्य और नकारात्मक ऊर्जा के विनाश का प्रतीक है। मां कालरात्रि का स्वरूप भी अंधकार को समाप्त करने वाला है, इसलिए इस दिन इस रंग को अपनाने से भय दूर होता है और आत्मबल में वृद्धि होती है।
सातवें नवरात्र की पूजा विधि और भोग
सातवें नवरात्र के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां कालरात्रि का ध्यान करें। पूजा स्थान को शुद्ध कर दीपक जलाएं और माता को रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए गुड़ या गुड़ से बने व्यंजन का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
आज के नवरात्र का मंत्र
पूजा के दौरान ॐ देवी कालरात्र्यै नमः इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सातवें नवरात्र की कथा (मां कालरात्रि की कथा)
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब दुष्ट राक्षसों का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया और देवता भयभीत हो गए, तब मां दुर्गा ने अपने उग्र स्वरूप मां कालरात्रि का अवतार लिया। उनका यह रूप अत्यंत भयंकर था। माता इस स्वरूप में काले वर्ण वाली, खुले केश, गले में माला और अग्नि समान तेजस्वी नेत्र वाली हैं। मां कालरात्रि ने अपने इस रूप से दानवों का संहार किया और तीनों लोकों को भयमुक्त किया।
भले माता यह स्वरूप डरावना है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए उन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। उनकी पूजा से सभी प्रकार के भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं।
मां कालरात्रि की आरती
जय कालरात्रि माता, जय महाकाली।
दुष्ट दलन करने वाली, संकट हरने वाली।।
भय हरणी, शुभ करनी, तुम जग की रानी।
तीनों लोकों में फैली, तेरी ही कहानी।।
काले केश, विकराल रूप, अद्भुत तेरी माया।
भक्तों की रक्षा करती, दूर करे सब छाया।।
जो भी तेरी शरण में आए, भय उसका मिट जाए।
तेरे नाम का सुमिरन करके, जीवन सफल हो जाए।।
जय-जय मां कालरात्रि, संकट हरने वाली।
भक्तों पर कृपा करो, हे जग की रखवाली।।
