Aaj kya hai 3 June 2026: 3 जून 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। एक तरफ पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास का 18वां दिन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा। हालांकि पंचांग देखने पर कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि जब सूर्योदय के समय तृतीया तिथि है, तो फिर आज चतुर्थी व्रत कैसे रखा जा रहा है? इसका उत्तर संकष्टी चतुर्थी के विशेष नियमों में छिपा है।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आज कौन सी तिथि है, कौन सा व्रत है और आज का दिन क्यों विशेष माना जा रहा है, तो आइए विस्तार से समझते हैं।
आज 3 जून को तृतीया है या चतुर्थी
पंचांग के अनुसार 3 जून 2026 को सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। तृतीया तिथि दिनभर रहेगी और रात्रि 9 बजकर 21 मिनट पर चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। इसके बाद चतुर्थी तिथि 4 जून की रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।
यही कारण है कि दिन की प्रमुख तिथि तृतीया मानी जाएगी, लेकिन रात्रि में चतुर्थी का प्रवेश होने से धार्मिक दृष्टि से यह दिन संकष्टी चतुर्थी के लिए भी महत्वपूर्ण बन जाता है।
आज 3 जून को कौन सा व्रत रखा जाएगा
आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी को विभुवन संकष्टी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी संकष्टी मानी जाती है।
इस दिन भगवान गणेश के विभुवन गणेश स्वरूप की पूजा की जाती है। भक्त उपवास रखकर गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और नारियल के लड्डुओं का भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उदया तिथि तृतीया, फिर भी आज क्यों रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी व्रत
आमतौर पर अधिकांश व्रत और पर्व उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। लेकिन संकष्टी चतुर्थी का नियम थोड़ा अलग है। इस व्रत में चंद्रोदय के समय जो तिथि होती है, उसी के आधार पर व्रत का निर्धारण किया जाता है।
3 जून को चतुर्थी तिथि रात्रि 9:21 बजे शुरू होगी। वहीं संकष्टी के दिन चंद्रोदय रात 10:03 बजे होगा। उस समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी। यही कारण है कि भले ही सूर्योदय के समय तृतीया तिथि हो, लेकिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी होने के कारण विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज ही रखा जाएगा।
पुरुषोत्तम मास का 18वां दिन भी है आज
आज पुरुषोत्तम मास का 18वां दिन भी है। हिंदू पंचांग में अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। यह लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इसे पुरुषोत्तम मास, मल मास या अधिक मास के नाम से जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान और भगवान के स्मरण का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस पूरे मास को आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय माना गया है।
पुरुषोत्तम मास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं
अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा, गीता पाठ, भागवत कथा श्रवण, दान-पुण्य और व्रत को विशेष महत्व दिया गया है। वहीं विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यवसाय शुरू करना, वाहन खरीदना और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि यह महीना सांसारिक उत्सवों से अधिक ईश्वर भक्ति और आत्मिक उन्नति के लिए समर्पित होना चाहिए।
आज 3 जून का दिन विशेष
3 जून 2026 को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि रहेगी, लेकिन रात्रि 9:21 बजे से चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा। चूंकि संकष्टी चतुर्थी का निर्धारण चंद्रोदय के समय की तिथि के आधार पर किया जाता है और चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। साथ ही पुरुषोत्तम मास का पुण्यकाल भी जारी है, जिससे यह दिन गणेश भक्ति, विष्णु आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है।
