अध्यात्म

अधिकमास में क्यों बढ़ जाता है गोवर्धन परिक्रमा का महत्व, जानें कितने किलोमीटर की है ये परिक्रमा

Govardhan Parikrama: अधिकमास में धार्मिक यात्राओं का महत्व काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में गोवर्धन परिक्रमा करने बहुत से लोग जाते हैं। आइए जानते हैं इसका महत्व और कितने कीलोमीटर की है यात्रा?

Image

अधिकमास में गोवर्धन परिक्रमा का महत्व

Govardhan Parikrama: भगवान कृष्ण से जुड़ी ब्रजभूमि की पवित्र धरा पर स्थित गोवर्धन पर्वत केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन बात जब अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की आती है तो इन दिनों में गोवर्धन परिक्रमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। यही कारण है कि ये माह श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जाता है। इस खास महीने में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गोवर्धन पहुंचकर परिक्रमा करते हैं और आध्यात्मिक पुण्य की कामना करते हैं। आइए जानते हैं क्यों अधिकमास (Adhik Maas 2026) में बढ़ जाता है गोवर्धन परिक्रमा का महत्व।

क्यों खास होता है अधिकमास

हिंदू पंचांग में लगभग हर तीन वर्ष बाद अधिकमास आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है और इसमें किए गए जप, तप, दान, व्रत और तीर्थ यात्रा का फल सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण ब्रजभूमि में किए गए धार्मिक कार्य विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। इसी वजह से गोवर्धन परिक्रमा का महत्व भी बढ़ जाता है।

गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। जिसके बाद श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। तभी से गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। यही कारण है कि भगवान कृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए अधिकमास में लोग गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाते हैं।

कितने किलोमीटर की है गोवर्धन परिक्रमा

गोवर्धन पर्वत की बड़ी परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर लंबी मानी जाती है। यह परिक्रमा गोवर्धन कस्बा, दानघाटी, मानसी गंगा, राधाकुंड, श्यामकुंड, पूंछरी का लौठा और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर गुजरती है। इस यात्रा में शामिल श्रद्धालु नंगे पैर चलकर इस परिक्रमा को पूरा करते हैं। जबकि कुछ भक्त इस परिक्रमा को दंडवत रूप में भी करते हैं, जिसे अत्यंत कठिन साधना माना जाता है।

इसके अलावा कई श्रद्धालु केवल गिरिराज जी की छोटी परिक्रमा भी करते हैं, जो अपेक्षाकृत कम दूरी (11 किलोमीटर) की होती है। हालांकि धार्मिक दृष्टि से बड़ी परिक्रमा का विशेष महत्व माना गया है।

अधिकमास में उमड़ते हैं श्रद्धालु

धार्मिक मान्यता और लोगों का विश्वास है कि अधिकमास में गोवर्धन परिक्रमा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दौरान ब्रज क्षेत्र में विशेष भजन, कीर्तन, कथा और धार्मिक आयोजन भी होते हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु गिरिराज महाराज के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।

आस्था और आध्यात्मिक अनुभव का संगम

गोवर्धन परिक्रमा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आत्मिक शांति का अनुभव भी है। अधिकमास में जब हजारों-लाखों भक्त एक साथ राधे-राधे और गिरिराज महाराज की जय का जयघोष करते हुए परिक्रमा मार्ग पर चलते हैं, तब यह यात्रा एक अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव का रूप ले लेती है। यही कारण है कि अधिकमास में गोवर्धन परिक्रमा को विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article