Aaj ka Roja iftar ka Time kya hai: रमज़ान का महीना बहुत बरकतों वाला माना जाता है। इसे रहमत, मग़फिरत और जहन्नम से निजात का महीना कहा जाता है। माना जाता है कि रोज़ा रखने वाले की दुआ इफ्तार के समय खास तौर पर कबूल होती है। इसलिए जब रोज़ा खोलें, तो अल्लाह का शुक्र अदा करें और अपने लिए, अपने परिवार के लिए और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें। यहां आप आज आठवें रोज़े का इफ्तार समय जान सकते हैं। साथ ही इफ्तार की दुआ, रोज़े की नियत और उससे जुड़े जरूरी नियमों की जानकारी भी पा सकते हैं।
आज का इफ्तार कितने बजे है, शहर अनुसार समय (Roza Iftar Timing Today)-
| शहर का नाम | इफ्तार का समय |
| दिल्ली | 6:17 PM |
| नोएडा | 6:20 PM |
| लखनऊ | 6:05 PM |
| पटना | 5:49 PM |
| हैदराबाद | 6:22- 6:28 PM |
| मुंबई | 6:40- 6:44 PM |
| जयपुर | 6:27 PM |
| पुणे | 6:40 PM |
| बेंगलुरू | 6:28- 6:29 PM |
इफ्तार करने की दुआ-
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू।
अर्थ- हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोज़ा खोला।
इफ्तार की दुआ इंग्लिश में-
Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizq-ika-aftartu
Meaning- O Allah! I fasted for You, I believe in You, I trust in You and with Your sustenance I break my fast.
अरबी में रोज़ा खोलने की दुआ-
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
मगरिब की नमाज क्या है?
मगरिब की नमाज सूर्यास्त के तुरंत बाद पढ़ी जाने वाली चौथी अनिवार्य नमाज है। इसमें कुल 7 रकातें होती हैं- 3 फर्ज (अनिवार्य), 2 सुन्नत-ए-मुअक्कदा, और 2 नफिल। सबसे पहले 3 रकात फर्ज (ऊंची आवाज में तिलावत के साथ) पढ़ी जाती है, जिसके बाद 2 सुन्नत और फिर 2 नफिल अदा की जाती है। यह नमाज रात की शुरुआत का प्रतीक है।
इफ्तार करने का तरीका-
सूरज ढलते ही यानी मग़रिब की अज़ान होते ही इफ्तार करना सुन्नत है और समय पर करना ज़रूरी है। सुन्नत का पालन करते हुए खजूर या सादे पानी से रोज़ा खोलना सबसे बेहतर माना गया है। बिस्मिल्लाह पढ़ें और रोजा खोलते समय यह दुआ पढ़ें- 'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु'। इफ्तार के समय ही रोज़ा खोलने की नियत (इरादा) करनी चाहिए। फिर फल, शरबत जैसा हल्का भोजन ही करना चाहिए। इफ्तार के तुरंत बाद या थोड़ी देर बाद ही मग़रिब की नमाज़ अदा करना चाहिए।
