Aaj chand kab niklega 6 march 2026 (आज चांद निकलने का समय), Moonrise time today (आज चतुर्थी का चांद कब दिखेगा): आज 6 मार्च 2026 को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला यह व्रत भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन कई लोग सुबह से ही व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलते हैं। जानिए आज चांद कब निकलेगा या चतुर्थी का चांद किस समय दिखाई देगा। यहां से भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का पारण कब और कैसे करें की पूरी जानकारी..
आज चांद कब निकलेगा
पंचांग के अनुसार आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा रात में दिखाई देगा। ज्योतिष गणनाओं के मुताबिक आज चांद लगभग रात लगभग 9:30 PM - 9:45 बजे के आसपास निकलने की संभावना है। हालांकि अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में भी लगभग इसी समय चंद्र दर्शन हो सकता है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का खास महत्व होता है, इसलिए भक्त रात तक चांद का इंतजार करते हैं।
चतुर्थी का चांद कब दिखेगा
आज फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पड़ रही है, जिसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 6 मार्च की शाम से शुरू होकर अगले दिन तक रहती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनसे जीवन के संकट दूर करने की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत में चंद्र दर्शन करना जरूरी होता है, इसलिए चंद्रमा निकलने के बाद ही पूजा पूरी मानी जाती है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलना है
संकष्टी चतुर्थी के व्रत का नियम है कि इसे पूरे दिन रखने के बाद रात में चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। जब चंद्रमा दिखाई दे जाए तो पहले चंद्र देव को जल या दूध से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा की जाती है और फिर व्रत का पारण किया जाता है। आज के दिन लगभग रात 9:30 PM - 9:45 बजे के बाद चंद्र दर्शन करके व्रत खोला जा सकता है।
भालचंद्र संकष्टी का पारण कब और कैसे करें
बता दें कि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के व्रत का पारण भी एक खास विधि से किया जाता है। इसमें चंद्रमा निकलने के बाद सबसे पहले चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है और उनसे सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके बाद भगवान गणेश की आरती और पूजा की जाती है। कई लोग इस समय गणपति मंत्र या गणेश चालीसा भी पढ़ते हैं। पूजा पूरी होने के बाद फल या हल्का भोजन करके व्रत खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया व्रत जीवन के संकटों को कम करने में मदद करता है और भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।
