अध्यात्म

आज भाई दूज है क्या? आज भाई दूज है या नहीं, जानें भाई दूज की सही तारीख

Bhai Dooj Kab Hai: हर साल दीपावली के दो दिन बाद यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है। इस साल भाई दूज कब है, इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूजन है। कई सारे लोग तो आज ही भाई दूज मना रहे हैं। तो आइये बताते हैं कि क्या आज भाई दूज है?

Image

bhai dooj 2025 date (pic credit: canva)

Bhai Dooj Kab Hai: भाई दूज को भैया दूज, भातृ द्वितीया, भाऊ बीज, या भाई टीका भी कहा जाता है। यह त्योहार भाई और बहन के प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक है। हर साल दीपावली के दो दिन बाद यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ये त्योहार मनाया जाता है। भाई दूज के दिन बहन अपने भाई को टीका (तिलक) लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है, और भाई बहन को स्नेह, उपहार और सुरक्षा का वचन देता है। इस साल भाई दूज किस दिन है, ये आपको यहां से पता चलेगा।

भाई दूज कब है 2025 में?

इस साल द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर 2025, को रात 08 बजकर 16 मिनट पर होगी। इसके साथ ही इसका समापन 23 अक्टूबर 2025, को रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, भाई दूज 2025 में 23 अक्टूबर 2025, दिन बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा।

भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त 2025-

भाई दूज के दिन टिका लगाने के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं-

  • पहला शुभ मुहूर्त- सुबह 05:07 से 08:55 तक
  • दूसरा शुभ मुहूर्त- दोपहर 11:56 से 12:43 तक

भाई दूज का महत्व-

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पधारे थे। बहन ने विधिवत पूजा कर उन्हें भोजन कराया और तिलक लगाया। यमराज ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक लगाएगी, उसके भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और समृद्धि का वरदान मिलेगा।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

और पढ़ें
End of Article