7 october 2025 ko kya hai (7 october 2025 kaun si tithi hai): 7 अक्टूबर 2025 को मंगलवार का दिन है। इस दिन सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि है। इस कारण पूर्णिमा स्नान और दान 7 अक्टूबर को ही किया जाएगा। वहीं, शरद पूर्णिमा का व्रत और पूजन 6 अक्टूबर को था। 7 अक्टूबर के दिन महर्षि वाल्मिकी जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन महर्षि वाल्मिकी का जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने ही रामायण ग्रंथ की रचना की थी। इसके साथ ही इसी दिन मीराबाई का भी जन्म हुआ था। मीराबाई भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त और संत थीं। इस दिन कोई खास व्रत तो नहीं है, सिर्फ जो मंगल का व्रत रखते हैं, वे ही इस दिन व्रत कर सकते हैं।
7 अक्टूबर 2025 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, 7 अक्टूबर 2025 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर 2025 की दोपहर 12:23 बजे शुरू होकर 7 अक्टूबर 2025 को सुबह 9:16 बजे समाप्त होगी। इसके बाद कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन पंचक, गंड मूल, और सर्वार्थ सिद्धि योग भी है, जो कुछ कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
7 अक्टूबर 2025 को कौन सा व्रत या त्योहार है?
7 अक्टूबर 2025 को मुख्य रूप से वाल्मिकी जयंती मनाई जा रही है, जो महर्षि वाल्मिकी के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है। वाल्मिकी जयंती आश्विन पूर्णिमा पर पड़ती है, जो रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मिकी को समर्पित है। इस दिन लोग रामायण का पाठ करते हैं, दान देते हैं और भगवान राम की पूजा करते हैं।
इसके अलावा इस दिन मीरा बाई जयंती भी कुछ क्षेत्रों में मनाई जाती है, जो भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त मीरा बाई के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है।
क्या 7 अक्टूबर 2025 को भी शरद पूर्णिमा है?
शरद पूर्णिमा मुख्य रूप से 6 अक्टूबर 2025 को मनाई गई है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर को होती है और रात में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। हालांकि, पूर्णिमा तिथि 7 अक्टूबर की सुबह तक है। इस कारण उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा स्नान और दान 7 अक्टूबर की सुबह किया जाएगा।
वाल्मिकी जयंती का महत्व
वाल्मिकी जयंती महर्षि वाल्मिकी के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है, जो रामायण के रचयिता और आदि कवि हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा और रामायण पाठ से ज्ञान, भक्ति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन लोग मंदिरों में जाते हैं, दान करते हैं, और गरीबों को भोजन वितरित करते हैं। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण का पूजन इस दिन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
