Aaj Kaun Si Tithi Hai (आज कौन सी तिथि है): भारतीय संस्कृति में तिथियों और व्रतों का अत्यंत गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हर दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा, उपासना या विशेष अनुष्ठान से जुड़ा होता है। व्रत न केवल धार्मिक कर्तव्य का प्रतीक होते हैं, बल्कि व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास को भी दर्शाते हैं। ऐसे में यह जानना कई श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण होता है कि आज कौन-सा व्रत और त्योहार हैं, जिससे वो उचित नियमों के अनुसार और पूरी विधि के साथ पूजा-पाठ कर सकें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आज किस देवता का व्रत है और आज तिथि कौन सी है। साथ ही आप आज के मुहूर्त की जानकारी भी यहां से ले सकते हैं।
6 अक्टूबर को कौन सा व्रत है? (Aaj Kaun Sa Vrat Hai)
6 अक्टूबर 2025 को शरद पूर्णिमा का व्रत है। साथ ही इस दिन कोजागिरी पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाएगा।
6 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? (Aaj Kaun Si Tithi Hai)
6 अक्टूबर 2025 को पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो दोपहर 12:23 बजे तक रहेगी, उसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी।
6 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त (Aaj Ka Shubh Muhurat)-
- ब्रह्म मुहूर्त- 4:53AM से 5:42AM
- अभिजित मुहूर्त- 12:03PM से 12:50PM
- विजय मुहूर्त- 02:25PM से 03:13PM
- गोधूलि मुहूर्त- 6:23PM से 6:47PM
- अमृत काल- 11:40PM से 1:07AM (7 अक्टूबर)
- निशिता मुहूर्त- 12:02AM (7 अक्टूबर)
6 अक्टूबर के अशुभ मुहूर्त (Aaj Ka Ashubh Muhurat)-
- राहु काल- प्रातः 07:45 बजे से 09:13 बजे तक
- यमगण्ड काल- प्रातः 10:41 बजे से 12:09 बजे तक
- गुलिक काल- दोपहर 01:37 बजे से 03:05 बजे तक
- दुर्मुहूर्त- दोपहर 12:32 बजे से 01:19 बजे तक
- आडल योग- 07 अक्टूबर प्रातः 04:01 बजे से 06:17 बजे तक
- गण्ड मूल योग- 07 अक्टूबर प्रातः 04:01 बजे से 06:17 बजे तक
- वर्ज्य काल- दोपहर 02:58 बजे से 04:25 बजे तक
- भद्रा काल- दोपहर 12:23 बजे से रात्रि 10:53 बजे तक
- बाण (मृत्यु बाण)- प्रातः 10:56 बजे से पूरी रात्रि
- पंचक पूरे दिन रहने वाला है।
आज व्रत क्यों रखा जाता है? (Sharad Purnima Ka Vrat Kyu Rakha Jata Hai)
शरद पूर्णिमा और कोजागिरी का व्रत धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से चंद्र देव और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में औषधीय और अमृत तुल्य गुण होते हैं, जो शरीर और मन को शुद्ध करते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो व्यक्ति इस दिन जागकर पूजा करता है, उसे विशेष रूप से धन-धान्य, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, यह व्रत रोग-नाश, मानसिक शांति, और मनोकामना पूर्ति के लिए भी रखा जाता है।
