अध्यात्म

4 June 2025 Panchang: पंचांग से जानिए ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के शुभ मुहूर्त, राहुकाल समय, दिशा शूल और खास उपाय

4 June 2025 Panchang: बुधवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन महेश नवमी का त्योहार मनाया जाता है। आज नवमी तिथि रात 11:55 तक रहेगी फिर दशमी लग जाएगी। जानिए इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल समय क्या रहेगा।

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4 June 2025 Panchang

4 June 2025 Panchang: आज ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष नवमी, दिवस बुधवार है। ज्येष्ठ नवमी व्रत रहे। आज भैरो जी की पूजा बहुत ही पुण्यदायी होती है। तंत्र में माता काली जी की उपासना करें। बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ करें। शिव मंदिर परिसर में पाकड़, गूलर पीपल, बेल व आम सहित कुछ वृक्षारोपण करें, इस महान कृत्य से पापों का शमन होता है। जल भरा घड़ा व फलों का दान करना बहुत फलित होता है। मन का निर्मल व सात्विक होना बहुत ही आवश्यक है। घर की छत पर विहंगों को दाना -पानी दें। गौ शाला जाएं, वहां गौ माता को रोटी, गुड़, चारा,पालक इत्यादि खिलाने से अखण्ड पुण्य की प्राप्ति होती है। घर के मन्दिर में चतुर्दिक दीपक जलाएं व दुर्गासप्तशती का पाठ करें। सप्तश्लोकी दुर्गा का 09 बार पाठ करें। माता दुर्गा जी के 32 नाम का संकीर्तन करें। माता -पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। अब जानिए आज के शुभ मुहूर्त और राहुकाल समय क्या रहेगा।

4 June 2025 Panchang

संवत- विक्रम संवत 2082

माह- ज्येष्ठ,शुक्ल पक्ष

तिथि - नवमी 11:55pm तक फिर दशमी

पर्व- ज्येष्ठ नवमी व्रत

दिवस -बुधवार

सूर्योदय- 05:05 am

सूर्यास्त- 7:07pm

नक्षत्र- उत्तराफाल्गुनी

चन्द्र राशि - सिंह 07:35 am तक फिर कन्या राशि

सूर्य राशि- वृष

करण- बालव 10 :56 am तक फिर कौलव

योग- वज्र 08 :31 am तक फिर सिद्धि

4 June 2025 Shubh Muhurat

अभिजीत मुहूर्त- नहीं है।

विजय मुहूर्त-02:21pm से 03:28pm तक

गोधुली मुहूर्त--06:24pm से 07:23pm तक

ब्रम्ह मुहूर्त-4:09m से 05:07am तक

अमृत काल-06:04am से 07:45am तक

निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:43से 12:24तक रात

संध्या पूजन-06:21pm से 07:03pm तक

दिशा शूल- ऊत्तर -पश्चिम दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।

अशुभ मुहूर्त- राहुकाल-दोपहर 12 बजे से 01:30 बजे तक

क्या न करें- ऊर्जा न तो उत्तपन्न होती है तथा न ही नष्ट होती है। ऊर्जा का रूपांतरण होता है। अपनी आंतरिक आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रयोग समाज निर्माण व सकारात्मक कार्यों के लिए करें।

Sujeet jee Maharaj
सुजीत जी महाराज author

सुजीत जी महाराज ज्योतिष और वास्तु विज्ञान एक्सपर्ट हैं जिन्हें 20 वर्षों का ज्योतिष, तंत्र विज्ञान का अनुभव हासिल हैं। 25000 से ऊपर लेख देश के कई बड़... और देखें

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