23 जनवरी 2026 को क्या है, 23 जनवरी को कौन सा व्रत रहेगा, इन दिन किसकी होगी पूजा
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 23, 2026, 04:41 AM IST
23 जनवरी के दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि हैं। इस दिन गुप्त नवरात्रि की पंचमी और बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। 23 जनवरी को माता सरस्वती का पूजन किया जाता है और उनके निमित्त व्रत भी रखा जाता है। आइए जानते हैं 23 जनवरी को माता सरस्वती का पूजन कैसे करें?
23 जनवरी 2026 को क्या है?
23 जनवरी 2026 के दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से पंचमी तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसे बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। बसंत पंचमी का संबंध ज्ञान, विद्या, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती से है। इसी कारण इस दिन सरस्वती पूजा का विशेष विधान होता है। यह दिन शिक्षा, संगीत, लेखन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
23 जनवरी 2026 को कौन-सा व्रत रहेगा?
23 जनवरी 2026, शुक्रवार को बसंत पंचमी का व्रत रहेगा। इसे श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है। कई लोग इस दिन पूर्ण व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार कर पूजा-अर्चना करते हैं।
बसंत पंचमी पर किसकी होती है पूजा?
बसंत पंचमी के दिन मुख्य रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या, संगीत, कला और वाणी की देवी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि पर ब्रह्मा जी के मुख से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, जिससे संसार में ज्ञान का प्रकाश फैला। इस दिन देवी को पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले रंग के भोग अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही इस दिन गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन भी होता है, तो इस दिन मां छिन्नमस्ता का भी पूजन होता है। दक्षिण भारत में आज के दिन श्रीपंचमी मनाई जाती है। इस कारण वहां माता लक्ष्मी का पूजन होता है। आज के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती की सगाई हुई थी। इस कारण भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन बेहद शुभ फलदायी होता है।
बसंत पंचमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, विद्यारंभ और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार और संगीत से जुड़े लोग इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा करते हैं। हालांकि इस साल शुक्र ग्रह अस्त अवस्था में हैं तो विवाह के लिए शुभ नहीं होगा।
बसंत पचंमी पर सरस्वती पूजा की विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। देवी के समक्ष दीपक जलाएं और उन्हें पीले पुष्प, केसर, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। किताब, कलम और वाद्य यंत्रों को भी पूजा स्थल पर रखकर मां सरस्वती का आशीर्वाद लिया जाता है। पूजा के बाद सरस्वती वंदना और मंत्रों का जाप किया जाता है।
सरस्वती पूजा के प्रमुख मंत्र
बसंत पंचमी के दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
सरस्वती बीज मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
सरस्वती गायत्री मंत्र
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे
ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि
तन्नो देवी प्रचोदयात्
सरस्वती वंदना मंत्र
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना
विद्या प्राप्ति मंत्र
सरस्वति नमस्तुभ्यं
वरदे कामरूपिणि
विद्यारम्भं करिष्यामि
सिद्धिर्भवतु मे सदा
ज्ञान वृद्धि मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं ऐं सरस्वत्यै नमः
बसंत पंचमी पर क्या करना शुभ माना जाता है?
इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना, पीले खाद्य पदार्थों का सेवन करना और ज्ञान से जुड़ी चीजों का सम्मान करना शुभ माना जाता है। बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान देना यानी विद्यारंभ संस्कार भी इसी दिन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से जीवन में अज्ञान का अंधकार दूर होता है और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।