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नौकरी के फ्रंट पर अच्छी खबर,2 करोड़ नौकरियां वापस आईं,शहरों में अब ज्यादा वेतन

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 11, 2022, 05:04 PM IST

Salaried Jobs in India: CMIE द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2022 तक 2 करोड़ नौकरियां वापस आ गई हैं। और इसका असर यह हुआ है कि देश की कुल नौकरियों में Salaried Jobs की हिस्सेदारी 21.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। जो कि लॉकडाउन में गिरकर 17 फीसदी पर आ गई थी।

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भारत में नौकरियों के अवसर बढ़े

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • सितंबर के महीने में जहां 8.6 करोड़ नौकरियां आई हैं। वहीं अक्टूबर में 8.47 करोड़ नौकरियां वापस आईं ।
  • लॉकडाउन में स्थायी वेतन वाली नौकरियों की संख्या घटकर 6.5 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई थी।
  • शहरी इलाकों में अब औसत वेतनमान 3 लाख रूपये सालाना पहुंच गया है।

Jobs In India: नौकरी के मोर्चे पर अच्छी खबर है। देश में मार्च 2020 में कोविड-19 की वजह से लगे लॉकडाउन के बाद पहली बार वेतन भोगी (Salaried Jobs) यानी संगठित क्षेत्र में नौकरियों का स्तर लॉकडाउन से पहले के स्तर पर पहुंचा है। अच्छी बात यह है कि यह सुधार लगातार दो महीने से जारी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE)के अनुसार बीते सितंबर और अक्टूबर में वेतन वाली नौकरियों की संख्या लॉकडाउन के पहले के स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर के महीने में जहां 8.6 करोड़ नौकरियां आई हैं। वहीं अक्टूबर में 8.47 करोड़ नौकरियां वापस आई । सितंबर की तुलना में अक्टूबर में वेतमान वाली नौकरियों की संख्या भले घटी है, लेकिन इसके बावजूद यह मार्च 2020 के पहले के स्तर पर पहुंच गई हैं।

2 करोड़ नौकरियां वापस आई

CMIE द्वारा पब्लिक की गई रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2022 तक 2 करोड़ नौकरियां वापस आ गई हैं। और इसका असर यह हुआ है कि देश की कुल नौकरियों में Salaried Jobs की हिस्सेदारी 21.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। जो कि लॉकडाउन में गिरकर 17 फीसदी पर आ गई थी। और नौकरियों की संख्या घटकर 6.5 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई थी। कुल नौकरियों में वेतन वाली नौकरियों का मौजूदा स्तर लॉकडाउन के पहले के स्तर के करीब है। उस वक्त Salaried Jobs की 22 फीसदी हिस्सेदारी हुआ करती थी।

पहले लॉकडाउन में 18 फीसदी ने गंवाई थी नौकरी

रिपोर्ट में एक अहम बात जो सामने आई है कि मार्च 2020 में जब लॉकडाउन लगा था। तो पहले महीने में 18 फीसदी वेतन भोगी लोगों की नौकरी चली गई थी। और इस दौरान शहरी इलाकों में ज्यादा लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। ऐसे में जब रिकवरी हो रही है तो शहरों में ही इसका ज्यादा असर दिख रहा है। सितंबर में जहां शहरी इलाकों में 21.4 लाख नौकरियां वापस आईं, वहीं अक्टूबर 2022 में 22.6 लाख नौकरियां वापस आईं। इसके अलावा अच्छी बात यह हुई है कि शहरी इलाकों में लॉकडाउन से पहले की तुलना में अब ज्यादा वेतन मिलने लगा है। शहरी इलाकों में औसत वेतनमान 3 लाख रुपये सालाना हो गया है। इसके पहले संगठित क्षेत्र में औसत वेतन सालाना 263,385 रुपये था।

दिहाड़ी मजदूरों और छोटे बिजनेस पर क्या असर

CMIE के अनुसार मार्च 2020 में जब लॉकडाउन लगाया गया था, तो अप्रैल 2020 में 68 फीसदी दिहाड़ी मजदूरों और 20 फीसदी कारोबार से जुड़े लोगों को बेरोजगार होना पड़ा था। हालांकि अगस्त 2020 आते-आते दिहाड़ी मजदूर और बिजनेस से जुड़े क्षेत्र में मार्च 2020 का स्तर आ गया था। लेकिन पिछले 2 महीने में असंगठित क्षेत्र में 1.18 करोड़ लोगों की नौकरियां गई हैं। जिन पर ध्यान देने की बेहद जरूरत है। और इसमें से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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