Ajab Gajab: दाढ़ी रखने पर देना पड़ता था टैक्स! इस देश का अनोखा नियम सुनकर रह जाएंगे दंग

क्या आप कभी कल्पना कर सकते हैं कि भला कोई देश अपने यहां के नागरिकों पर इस बात पर भी टैक्स लगा सकता है कि उसने दाढ़ी रखी हुई है। जी हां, आज हम आपको एक ऐसे ही देश के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर लोगों को दाढ़ी रखने पर टैक्स देना पड़ता था।

Authored by: मोनू झाUpdated Jan 14 2026, 18:54 IST
क्या आप दे पाएंगे जवाबImage Credit : IStock01 / 07

क्या आप दे पाएंगे जवाब

क्या आपको उस देश के बारे में पता है। जहां पर दाढ़ी रखने पर टैक्स देना पड़ता था। शायद ही आपको इसके बारे में पता हो।

1698 में शुरू हुआ टैक्सImage Credit : IStock02 / 07

1698 में शुरू हुआ टैक्स

रूस में एक समय दाढ़ी रखने पर टैक्स देना पड़ता था। यह टैक्स 1698 में Tsar Peter the Great ने शुरू किया था। पीटर द ग्रेट यूरोप गया था, जहाँ क्लीन-शेव चेहरा आधुनिकता का सिंबल माना जाता था।

​ लंबी दाढ़ी रखना परंपरा​Image Credit : IStock03 / 07

​ लंबी दाढ़ी रखना परंपरा​

वह चाहता था कि रूस भी यूरोप जैसा आधुनिक दिखे। उस समय रूस में पुरुष लंबी दाढ़ी रखना परंपरा और धर्म से जुड़ा था। दाढ़ी काटना कई लोगों के लिए पाप जैसा माना जाता था।

जनता, चर्च और अमीर लोगों ने किया विरोधImage Credit : IStock04 / 07

जनता, चर्च और अमीर लोगों ने किया विरोध

शुरुआत में पीटर ने दाढ़ी पूरी तरह बैन करने की कोशिश की। लेकिन जनता, चर्च और अमीर लोगों ने जबरदस्त विरोध किया। इसलिए पीटर ने सीधा बैन करने के बजाय टैक्स लगा दिया।

​अलग-अलग लोगों के लिए अलग टैक्स​Image Credit : IStock05 / 07

​अलग-अलग लोगों के लिए अलग टैक्स​

जो दाढ़ी रखना चाहता था, उसे पैसा देकर लाइसेंस लेना पड़ता था। टैक्स अलग-अलग लोगों के लिए अलग था।अमीर व्यापारी: 100 रूबल सालानाअधिकारी / नोबल: 60 रूबलआम लोग: 30 रूबलकिसान: शहर में आने पर थोड़ा सा टैक्स​​

​ Beard Token नाम​Image Credit : IStock06 / 07

​ Beard Token नाम​

टैक्स देने वालों को Beard Token नाम का धातु का सिक्का मिलता था। यह टोकन हमेशा साथ रखना जरूरी था, वरना अफसर जबरन दाढ़ी काट देते थे।

​ 1772 तक चला टैक्स ​Image Credit : IStock07 / 07

​ 1772 तक चला टैक्स ​

यह टैक्स 1772 तक चला, फिर Catherine the Great ने खत्म किया। यह टैक्स ज्यादा सफल नहीं रहा, क्योंकि ज्यादातर लोग अपनी दाढ़ी नहीं छोड़ना चाहते थे।

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