यूं तो आप रोज सड़कों पर वाहनों को दौड़ते हुए देखते होंगे। इन सबमें जो कॉमन चीज है, वो इनका पहिया है, जो काले रंग का होता है और इनके सभी पहिए एक समान होते हैं। मगर सड़क की जगह खेतों में दौड़ने वाला ट्रैक्टर इन सबसे अलग है और वजह भी इसका पहिया ही है, जो कभी भी एक जैसे नहीं होते।
अगर आपने ध्यान से ट्रैक्टर को देखा हो तो आपने पाया होगा कि इनका पहिया आकार में छोटा-बड़ा होता है। जहां आगे वाले पहिए छोटे तो पीछे वाले काफी बड़े होते हैं लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर ट्रैक्टर में ऐसा क्यों होता है, क्यों इसके पहिए आकार में काफी अलग-अलग होते हैं। आइए आज जानते हैं कि आखिर ट्रैक्टर के पहिए आगे छोटे और पीछे बड़े क्यों होते हैं?
सबसे पहले तो यह बात जान लें कि ट्रैक्टर के पहियों का आकार कोई डिजाइन नहीं बल्कि इनको इस तरह से बनाए जाने के पीछे की वजह विज्ञान से जुड़ी हुई है। सबसे पहले हम बात कर लेते हैं, ट्रैक्टर के उन बड़े पहियों की, जो पीछे की तरफ लगे होते हैं। फिर हम बात करेंगे ट्रैक्टर के आगे लगे उन छोटे पहियों की।
बता दें कि ट्रैक्टर के ये बड़े पहिए जमीन पर मजबूत पकड़ और भारी वजन खींचने के लिए होते हैं। ट्रैक्टर के इन बड़े पहियों में आपने देखा होगा कि इनके टायर का ग्रिप काफी गहरा और बड़ा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि खेतों की मिट्टी अक्सर नरम और गीली होती है, ऐसे में बड़े पहिए ट्रैक्टर को फिसलने से बचाते हैं और इनका ग्रिप फिसलन भरे जगह जैसे कीचड़ में भी ट्रैक्टर को आसानी से आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
दूसरा पीछे बड़े पहियों के होने का दूसरा कारण यह भी है कि ट्रैक्टर का इंजन इन बड़े पहियों को ही ताकत देता है। जिससे ट्रैक्टर भारी-भरकम वजन को भी आसानी से ढो लेता है। खेती के काम में हल, ट्रॉली और कई अन्य भारी-भरकम मशीनें लगाई जाती हैं, जिनका वजन काफी ज्यादा होता है और ट्रैक्टर के बड़े पहिए इस वजन को संभालने में मदद करते हैं।
अब हम बात करते हैं ट्रैक्टर के अगले और छोटे पहियों की। जिन्हें आसानी से मोड़ने और ट्रैक्टर का बैलेंस बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। दरअसल, खेतों में ट्रैक्टर को बार-बार घुमाना पड़ता है। छोटे पहिए होने से ट्रैक्टर जल्दी और आसानी से मुड़ जाते हैं। इसके अलावा छोटे पहिए ट्रैक्टर को बैलेंस रखने में भी मदद करते हैं। अगर आगे भी बड़े पहिए होते, तो ट्रैक्टर भारी और बेकाबू होता।
कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो ट्रैक्टर के पिछले पहिए ही असली काम करते हैं। ये पहिए ट्रैक्टर को ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी आसानी से चलने में मदद करते हैं। वहीं आगे के छोटे पहिए रास्ता दिखाने और दिशा बदलने का काम करते हैं। इसके अलावा अगर साफ शब्दों में कहें तो पीछे के बड़े पहिए ताकत और पकड़ के लिए होते हैं, जबकि आगे के छोटे पहिए कंट्रोल और डायरेक्शन के लिए होते हैं।