दुनिया में कई लोग अलग-अलग चीजें इकट्ठा करने का शौक रखते हैं। कोई सिक्के जमा करता है, कोई डाक टिकट तो कोई महंगी घड़ियां लेकिन अमेरिका के डूगी सैंडटाइगर का शौक थोड़ा अलग है। उनके पास हजारों जोड़ी क्रोक्स जूते हैं और इसी अनोखे कलेक्शन की वजह से उन्हें 'क्रोक किंग' के नाम से जाना जाता है।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, डूगी के पास कुल 3,569 जोड़ी आइकोनिक क्रोक्स जूतों का कलेक्शन है। यह संख्या इतनी ज्यादा है कि इसे सुनकर ही लोग हैरान रह जाते हैं लेकिन इस रिकॉर्ड के पीछे सिर्फ जूतों का शौक नहीं, बल्कि डूगी की जिंदगी से जुड़ी एक बेहद खास कहानी भी है।
डूगी का बचपन आसान नहीं था। वह फोस्टर केयर सिस्टम में बड़े हुए और लगातार एक परिवार से दूसरे परिवार में जाते रहे। इस दौरान उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की कई जरूरी चीजें ठीक तरह से नहीं सीख पाएं।
डूगी बताते हैं कि उन्होंने बचपन में कभी अपने जूतों के फीते बांधना नहीं सीखा। उन्हें लगता था कि हर कोई यह काम जानता है, इसलिए किसी ने उन्हें सिखाने की जरूरत नहीं समझी। इस वजह से उन्हें लंबे समय तक स्लिप-ऑन जूते, जेली शूज और वेल्क्रो स्ट्रैप वाले जूते पहनने पड़ते थे।
जब वह हाई स्कूल पहुंचे तो उनके वेल्क्रो वाले जूते दूसरे बच्चों के लिए मजाक का कारण बन गए। उन्हें बुली किया जाता था और इस बात से डूगी काफी शर्मिंदा महसूस करते थे। वह कहते हैं कि किसी ने उन्हें कभी जूते बांधना नहीं सिखाया और उन्होंने भी शर्म के कारण किसी से मदद नहीं मांगी।
डूगी की जिंदगी में बदलाव तब आया जब एक दिन वह अपने पड़ोस में घूम रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक महिला को लैवेंडर रंग के क्रोक्स पहने देखा। उस समय उन्हें क्रोक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्हें सिर्फ इतना पता था कि बहुत से लोग इन जूतों को पसंद नहीं करते और इन्हें बदसूरत तक कहते हैं लेकिन डूगी को उनमें कुछ अलग नजर आया। उन्हें क्रोक्स के डिजाइन में कला दिखाई दी। उसी दिन उन्होंने अपना पहला जोड़ा क्रोक्स खरीदा, जो सिंपल काले रंग का था। यहीं से उनके जूते इकट्ठा करने का सफर शुरू हुआ।
शुरुआत में डूगी का कोई बहुत बड़ा रिकॉर्ड बनाने का इरादा नहीं था। उन्होंने सोचा कि उनके पास साल के हर दिन पहनने के लिए एक अलग जोड़ी होनी चाहिए। उन्होंने 366 जोड़ी क्रोक्स का लक्ष्य रखा, ताकि लीप ईयर में 29 फरवरी के लिए भी एक अतिरिक्त जोड़ी मौजूद रहे लेकिन धीरे-धीरे उनका शौक बढ़ता गया। वह अलग-अलग रंग, डिजाइन और लिमिटेड एडिशन क्रोक्स खरीदने लगे। देखते ही देखते उनका कलेक्शन इतना बड़ा हो गया कि उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने के बारे में सोचना शुरू कर दिया।