भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी रेल नेटवर्क में से एक है, जो हर दिन करोड़ों यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। इसकी किफायती और आरामदायक यात्रा इसे आम लोगों की पहली पसंद बनाती है। (Photo-istock)
भारत में मुख्यतः दो प्रकार की ट्रेनें चलती हैं- गुड्स ट्रेनें, जो माल ढुलाई के लिए होती हैं, और पैसेंजर ट्रेनें, जिनमें यात्री सफर करते हैं। पैसेंजर कोचों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई खास इंतजाम किए जाते हैं। (Photo-istock)
हर पैसेंजर कोच में आमतौर पर 4 आपातकालीन खिड़कियां होती हैं, जिसे इमरजेंसी विंडो कहा जाता है। यह विशेष रूप से आकस्मिक परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए बनाई जाती है। (Photo-istock)
इमरजेंसी विंडो को बाकी खिड़कियों से अलग पहचान देने के लिए लाल रंग से पेंट किया जाता है। यह रंग दूर से ही यात्रियों का ध्यान खींचता है, जिससे आपात स्थिति में समय बर्बाद न हो। इसके अलावा कोच के अंदर भी इमरजेंसी विंडो के लिए साइन बोर्ड लगा होता है। (Photo-istock)
इन लाल खिड़कियों में आम खिड़कियों की तरह स्थायी लोहे की रॉड नहीं होती, बल्कि स्लाइडिंग रॉड लगी होती है जिसे आसानी से हटाकर रास्ता बनाया जा सकता है। यानी यहां से कोई व्यक्ति आसानी से बाहर निकल सकता है। (Photo-istock)
अगर ट्रेन में आग लग जाए, किसी हादसे की आशंका हो या दरवाजे तक पहुंचना संभव न हो, तो इस खिड़की से बाहर निकला जा सकता है। स्लाइडिंग रॉड को नीचे सरकाकर खिड़की पूरी तरह खोली जाती है और यात्री बाहर निकल सकते हैं। (Photo-istock)
इमरजेंसी विंडो का इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थितियों में ही किया जाना चाहिए। इसे मजाक या बिना वजह खोलना नियमों के खिलाफ है और यह किसी की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। (Photo-istock)