हनीकॉम्ब कूलर में खास तरह के पेपर पैड लगे होते हैं, जिनकी संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी होती है। यह डिजाइन पानी को ज्यादा समय तक रोककर रखता है और हवा को बेहतर तरीके से ठंडा करता है। इस तरह के कूलर आमतौर पर ज्यादा आधुनिक माने जाते हैं और इनकी कूलिंग क्षमता भी बेहतर होती है। यह बड़े कमरों या हॉल के लिए ज्यादा उपयुक्त होते हैं।
घास वाले कूलर लंबे समय से इस्तेमाल में आ रहे हैं। इनमें लकड़ी की पतली रेशेदार घास का इस्तेमाल होता है, जो पानी सोखकर हवा को ठंडा करती है। इनकी खास बात यह है कि ये किफायती होते हैं और मेंटेनेंस भी आसान होता है। छोटे कमरों या सीमित बजट वाले लोगों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।
अगर ठंडक की बात करें, तो हनीकॉम्ब कूलर घास वाले कूलर की तुलना में ज्यादा ठंडा करता है। इसका कारण यह है कि हनीकॉम्ब पैड पानी को लंबे समय तक बनाए रखता है और हवा को अधिक प्रभावी तरीके से ठंडा करता है, हालांकि अगर हवा का प्रवाह अच्छा हो और कमरे में वेंटिलेशन सही हो, तो घास वाला कूलर भी अच्छी ठंडक दे सकता है।
हनीकॉम्ब पैड की लाइफ ज्यादा होती है और इसे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं घास वाले पैड जल्दी खराब हो जाते हैं और हर सीजन में बदलने पड़ सकते हैं। मेंटेनेंस के मामले में घास वाला कूलर थोड़ा सस्ता पड़ता है, लेकिन लंबे समय में हनीकॉम्ब ज्यादा टिकाऊ साबित होता है।
घास वाले कूलर आमतौर पर सस्ते होते हैं, जबकि हनीकॉम्ब कूलर थोड़े महंगे होते हैं। अगर आपका बजट कम है, तो घास वाला कूलर बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप बेहतर कूलिंग और कम मेंटेनेंस चाहते हैं, तो हनीकॉम्ब कूलर लेना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
अगर आपको ज्यादा ठंडक, बेहतर परफॉर्मेंस और लंबी लाइफ चाहिए, तो हनीकॉम्ब कूलर बेहतर है।