अगर आप किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां भक्ति, ध्यान और प्रकृति एक साथ मिल जाएं, तो कोयम्बटूर जाने का प्लान कर सकते हैं। यहां 112 फीट ऊंची आदियोगी शिव प्रतिमा को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। विशाल पहाड़ों के बीच बनी यह मूर्ति इतनी भव्य लगती है कि लोग बस उसे देखते ही रह जाते हैं।
दिशहर की भागदौड़ से दूर यह एक शांत जगह है। चारों तरफ हरियाली, पहाड़ और साफ हवा लोगों को मानसिक सुकून देती है। कई लोग यहां सिर्फ मेडिटेशन और रिलैक्स होने के लिए आते हैं।
वेल्लिंगिरी पहाड़ियों की तलहटी में खूबसूरत ईशा योग केंद्र स्थित है। वेल्लिंगिरी पहाड़ियों की तलहटी की भी अपनी दिलचस्प कहानी है। मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां लंबे समय तक तपस्या की थी इसी वजह से आध्यात्मिक रूप से यह स्थान बेहद शक्तिशाली है।
कोयंबटूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसके सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है (जहां से ईशा योग केंद्र करीब 40 किमी दूर है)। अगर आप रेल मार्ग का चयन करते हैं तो जान लें कि कोयंबटूर जंक्शन दक्षिण भारत का प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो इसके निकटतम है। कोयंबटूर से टैक्सी या बस के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है।
स्टे को लेकर भी आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। बजट में कोयंबटूर शहर में होटल और गेस्ट हाउस आपको मिल जाएंगे। ईशा योग केंद्र में भी रहने की व्यवस्था है।
यह सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जिसे आप जिंदगीभर याद रखते हैं। यहां आध्यात्म, प्रकृति, शांति और संस्कृति का ऐसा मेल देखने को मिलता है जो शायद ही कहीं और मिले।